कुलदेवी-देवता की आराधना से दूर होती हैं बाधाएं: देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी।
सोनखेड़ी में श्रीमद् देवी भागवत कथा के द्वितीय दिवस देवी उपासना का बताया महत्व।

बैतूल। मुलताई विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम सोनखेड़ी में आयोजित तीन दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा रसपान एवं श्री मां पीताम्बरा सहस्त्रनाम महायज्ञ के द्वितीय दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
परम पूज्या मां बगलामुखी सिद्ध साधिका देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी ने अपने प्रवचनों में धर्म, साधना और देवी उपासना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कुलदेवी एवं कुलदेवता की पूजा-विधि, उनके महत्व तथा पारिवारिक सुख-समृद्धि में उनकी भूमिका का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि नियमित आराधना से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कथा के दौरान गुरु माता ने मां भगवती दुर्गा की साधना और आराधना के महत्व को बताते हुए कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी उपासना करने से जीवन के कष्ट, संकट, बाधाएं और मानसिक अशांति दूर होने लगती हैं। उन्होंने मां बगलामुखी देवी को स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री बताते हुए कहा कि उनकी साधना से साधक को आत्मबल, संरक्षण और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा, साधना, सकारात्मक संकल्प और देवी कृपा का संगम जीवन की कठिन परिस्थितियों को सरल बनाने में सहायक होता है। मां बगलामुखी के यज्ञ, पूजन और अनुष्ठान परिवार में सुख-शांति, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर रहे। मां दुर्गा और मां बगलामुखी के जयघोषों से कथा पंडाल गुंजायमान होता रहा। यजमान नारायण दवण्डे एवं प्रमिला दवण्डे ने श्रद्धालुओं का स्वागत कर आभार व्यक्त किया। आयोजकों के अनुसार तृतीय एवं अंतिम दिवस पर भक्त चरित्र, पूर्णाहुति, महाआरती एवं कथा विश्राम का आयोजन किया जाएगा। क्षेत्र के अनेक गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति से आयोजन और अधिक भव्य एवं श्रद्धामय बन गया।




