जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत, हर व्यक्ति को करना होगा प्रयास: डॉ. डोंगरे।

वर्षा जल संचयन और वाटर हार्वेस्टिंग पर विद्यार्थियों को किया जागरूक। नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना हम सबकी जिम्मेदारी: डॉ. निर्मल बिस्वास । जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लेकर लौटे एनएसएस के स्वयंसेवक ।

आठनेर। जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को लेकर शासकीय महाविद्यालय आठनेर में राष्ट्रीय सेवा योजना की संयुक्त इकाई द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान एवं पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पर्यावरण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों को जागरूक किया।

मुख्य अतिथि डॉ. सुखदेव डोंगरे ने विद्यार्थियों को जल संरक्षण एवं संवर्धन के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता जल को संरक्षित करने की है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज पाटिल ने अपने उद्बोधन में वाटर हार्वेस्टिंग और वर्षा जल संचयन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को जल बचाने के व्यावहारिक उपाय बताए।

विशिष्ट अतिथि श्रीमती डोंगरे ने विद्यार्थियों से मेडिटेशन और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक और शारीरिक संतुलन के लिए योग को अपनाना आवश्यक है। डॉ. विकेश सिंह ने प्राचीन भारतीय जल संरक्षण पद्धतियों की जानकारी देते हुए बताया कि पुराने समय में बावड़ियों और जल कूपों का निर्माण कर जल संरक्षण किया जाता था।

डॉ. निर्मल बिस्वास ने कहा कि नदियां हमारे जीवन का आधार हैं, इसलिए उन्हें स्वच्छ रखना और प्रदूषण से मुक्त बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. साधना ठाकुर ने स्वयंसेवकों से अपने-अपने क्षेत्रों में जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के अंत में स्वयंसेविका शहीना कुरैशी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जल और वायु दोनों ही मानव जीवन के लिए अनिवार्य हैं तथा इन्हें प्रदूषित होने से बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। कार्यक्रम में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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