रावा में आध्यात्मिक जागरण का केंद्र बना त्रिकालदर्शी दरबार।
भक्तों को मिल रहा भूत, वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शन।

बैतूल। मुलताई तहसील के ग्राम रावा में आयोजित त्रिकालदर्शी चमत्कारी मां बगलामुखी देवी का निःशुल्क दिव्य दरबार इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 22 से 25 मई तक चल रहे इस दिव्य आयोजन में क्षेत्र सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सोमवार को दिव्य दरबार का चौथा दिवस पूर्ण हुआ, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
दिव्य दरबार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मां बगलामुखी की सिद्ध साधिका गुरू माता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी बिना जन्म दिनांक पूछे ही भक्तों के जीवन से जुड़े भूत, वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शन कर रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि गुरू माता दिव्य दृष्टि से उनके शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक कष्टों के मूल कारण बताकर सटीक समाधान प्रदान कर रही हैं। दरबार में आने वाले लोगों को पूजा-पाठ एवं साधना में हो रही त्रुटियों के साथ-साथ जीवन में आने वाली बाधाओं, आपत्तियों और कष्टों के कारणों की भी जानकारी दी जा रही है।
आयोजन समिति के रामशंकर देशमुख ने बताया कि मां बगलामुखी देवी के इस दिव्य दरबार के माध्यम से वर्तमान समय में आमजन के जीवन में व्याप्त शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं के निदान का मार्ग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बिना प्रश्न पूछे ही उनके मन के उत्तर प्राप्त हो जाते हैं और गुरू माता स्वयं भक्तों को अपने समक्ष बैठाकर उनके जीवन से जुड़े रहस्यों का उद्घाटन करती हैं। वहीं क्षेत्र की आर्थिक उन्नति, सामाजिक उत्थान एवं जनकल्याण को लेकर भी विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

समिति के अशोक देशमुख ने बताया कि रावा एवं गौला क्षेत्र प्राचीन काल से संतों की तपोभूमि रहा है। यहां स्थित कपिल मुनि आश्रम तथा पारसडोह से जुड़ी पारस पत्थर की सत्य घटनाएं आज भी क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आत्मज्ञानी संतों के अभाव में सनातन परंपराओं में आई त्रुटियों के बीच गुरू माता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी इस क्षेत्र को नई आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रही हैं।
मां बगलामुखी साधक रविन्द्र मानकर ने बताया कि गुरू माता एक दिव्य दृष्टि संपन्न ब्रह्मज्ञानी संत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोगों के पास जन्म दिनांक उपलब्ध नहीं होती, वहां भी गुरू माता बिना किसी पूर्व जानकारी के जातकों के जीवन के रहस्यों को जानकर उनकी समस्याओं के मूल कारणों का स्वतः उद्घाटन कर देती हैं। भक्तों के मन में उठ रहे प्रश्नों के उत्तर भी उन्हें बिना पूछे ही प्राप्त हो जाते हैं।
इसी कारण यह आयोजन अब त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है, जहां श्रद्धालुओं को भूत, वर्तमान एवं भविष्य के ज्ञाता का साक्षात अनुभव प्राप्त हो रहा है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारसडोह में निर्मित हो रहे मां बगलामुखी आश्रम के निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के लिए साधकों, शिष्यों एवं भक्तों को एक मंच पर एकत्रित कर आध्यात्मिक जागरण करना बताया गया है।




