रावा में निःशुल्क त्रिकालदर्शी मार्गदर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु।
विज्ञान और आध्यात्म का संदेश देकर गुरू माता ने श्रद्धालुओं को किया प्रेरित।

बैतूल। रावा ग्राम में आयोजित त्रिकालदर्शी मां बगलामुखी दिव्य दरबार में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक विज्ञान के दौर में भी आध्यात्मिकता के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। आयोजन के दौरान मां बगलामुखी की साधना, मंत्र-जाप और आशीर्वचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया गया।
गुरू माता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि विज्ञान मनुष्य को साधन देता है, लेकिन साधना जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझाती है। उन्होंने कहा कि जब विज्ञान और आध्यात्म का संतुलन स्थापित होता है, तभी मनुष्य सच्चे अर्थों में प्रगति कर सकता है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, भय और मानसिक अस्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि माँ बगलामुखी की साधना मन, बुद्धि और कर्म को स्थिर करने का प्रभावी आध्यात्मिक माध्यम है।
दिव्य दरबार में श्रद्धालुओं को निःशुल्क त्रिकालदर्शी मार्गदर्शन प्रदान किया गया, वहीं व्यक्तिगत समस्याओं के आध्यात्मिक समाधान भी बताए गए। विशेष पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम में अनुशासन, सेवा भाव और आध्यात्मिक समर्पण का उत्कृष्ट वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के सफल संचालन में मां बगलामुखी साधक शिष्य परिवार बैतूल से जुड़े समर्पित साधकों रविन्द्र मानकर, युवराज कापसे, राहुल राठौर, चंद्रप्रकाश देशमुख, वासुदेव ताड़गे, देवशंकर धोटे, आशीष कोसे, त्रिभुवन कोसे, रामशंकर देशमुख एवं अशोक देशमुख की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सहयोग से आयोजन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी पूरक हैं। जीवन में संतुलन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना ही वास्तविक प्रगति का आधार है तथा ईश्वर भक्ति मानसिक स्वास्थ्य और आत्मबल को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।




