सीएए, यूसीसी और वक्फ संशोधन कानून वापस लेने की मांग।

मांगें नहीं मानी गईं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी।

बैतूल। भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम 11 सूत्रीय मांग-पत्र जारी कर अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई है। संगठनों ने जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भेजते हुए कहा कि देश में सामाजिक सौहार्द और नागरिक समानता पर लगातार आघात हो रहे हैं, जिस पर तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।

ज्ञापन में सीएए, यूसीसी और वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 को संविधान विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की गई है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27, 28 और 29 का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है। संगठनों ने मॉब लिंचिंग, फर्जी गौकशी के नाम पर हिंसा और धार्मिक आधार पर हो रहे हमलों पर सख्त कानून बनाने तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

मांग-पत्र में निर्दोष मुस्लिम और ईसाई युवाओं, उलेमाओं व पास्टरों की निष्पक्ष जांच कर रिहाई, कम्यूनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट लागू करने, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 का कड़ाई से पालन कराने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा जातिगत जनगणना, आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी और सच्चर, मिश्रा, गोपाल सिंह व कुंडू आयोग की सिफारिशें लागू करने की बात कही गई है।

संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर देशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन तेज किया जाएगा।

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