निरगुड़ जलाशय विवाद पर उग्र हुए मछुआरे, मत्स्य निरीक्षक के खिलाफ किया धरना-प्रदर्शन।
निरीक्षक के खिलाफ नियम विरुद्ध पट्टा आवंटन का आरोप, रैली निकालकर सौंपा ज्ञापन। निरगुड़ जलाशय की 10 वर्षीय मछली पालन प्रक्रिया निरस्त करने की मांग। पारसडोह समिति को लाभ पहुंचाने के आरोप।

बैतूल। निरगुड़ जलाशय के मछली पालन पट्टे को लेकर आदिवासी मछुआरों का आक्रोश खुलकर सामने आया। शुक्रवार को शिवाजी चौक से रैली निकालते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीण और मछुआरे मत्स्य विभाग कार्यालय पहुंचे, जहां धरना प्रदर्शन कर मत्स्य निरीक्षक चेतन भावसार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने नियम विरुद्ध पट्टा प्रक्रिया और बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग उठाई।
जय जौहार आदिवासी मछुआ समूह निरगुड़ द्वारा कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन सौंपकर निरगुड़ जलाशय के 10 वर्षीय मछली पालन पट्टा आवंटन की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जनपद पंचायत आठनेर द्वारा 23 जुलाई 2025 को जारी की गई विज्ञप्ति नियम विरुद्ध है, क्योंकि निरगुड़ जलाशय अभी निर्माणाधीन है और उसका कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है।
ज्ञापन में बताया गया कि जल संसाधन विभाग मुलताई ने 18 दिसंबर 2025 के पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि निरगुड़ जलाशय का कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। ऐसे में जलाशय को मछली पालन विभाग अथवा किसी अन्य निकाय को हस्तांतरित नहीं किया गया है, इसलिए उसका मछली पालन पट्टा जारी किया जाना नियमों के विपरीत है।
आदिवासी मछुआ समूह ने मत्स्य निरीक्षक चेतन भावसार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पारसडोह मत्स्योद्योग सहकारी समिति धनोरा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियम विरुद्ध प्रक्रिया अपनाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि समिति का संचालन किशोर कुयटे और उनके परिवार द्वारा किया जा रहा है, जो वर्तमान में नगर परिषद आठनेर के निवासी हैं। वर्ष 2008-09 में नगर परिषद आठनेर के गठन के बाद गुणवंत नगर का अस्तित्व समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद वर्ष 2021 में निरगुड़ और गुणवंत नगर को समिति के कार्यक्षेत्र में जोड़ा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि नगर परिषद आठनेर के निवासी होने के बावजूद संबंधित लोगों ने स्वयं को गुणवंत नगर निवासी बताकर समिति की सदस्यता बनाए रखी। इनके राशन कार्ड, मतदाता सूची, मकान पट्टे और अन्य शासकीय लाभ आठनेर नगर परिषद से जुड़े होने का उल्लेख भी ज्ञापन में किया गया है।
मछुआ समूह ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम निरगुड़ को पारसडोह समिति धनोरा के कार्यक्षेत्र में शामिल करने से पहले ग्राम सभा और ग्राम पंचायत से अनापत्ति या अनुमोदन प्राप्त नहीं किया गया। समूह ने 24 नवंबर 2021 के कार्यक्षेत्र संशोधन आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि पारसडोह मत्स्योद्योग सहकारी समिति धनोरा को निरगुड़ जलाशय का पट्टा आवंटित किया गया तो स्थानीय आदिवासी मछुआरों में विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी। समूह ने संपूर्ण पट्टा प्रक्रिया निरस्त कर जल संसाधन विभाग से कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद नई प्रक्रिया शुरू करने तथा कथित फर्जी सदस्यता मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।




