बर्राढाना के उजड़े आशियाने, सिस्टम अब भी अस्थायी राहत में उलझा।
शिवसेना का आरोप - 24 परिवार बेघर, मदद आधी-अधूरी, पुनर्वास पर सरकार मौन।

बैतूल। भीमपुर तहसील अंतर्गत ग्राम बर्राढाना में हाल ही में हुई भीषण आगजनी की घटना में 24 परिवारों के घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए, जिससे वे खुले आसमान के नीचे जीवन यापन को मजबूर हो गए हैं। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं तक नष्ट हो जाने से प्रभावित परिवार गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
घटना के बाद जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। तत्काल सहायता के रूप में कुछ आर्थिक मदद और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई। हालांकि, अब सवाल यह उठ रहा है कि इन पीड़ित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
शिवसेना जिला अध्यक्ष विजेंद्र गोले ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राहत कार्यों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधि घटनास्थल पर पहुंचे और प्रारंभिक राहत उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसके बाद पुनर्वास की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। उनका कहना है कि अस्थायी मदद से कुछ समय के लिए राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन उजड़े हुए आशियानों को फिर से बसाने के लिए सरकारी स्तर पर ठोस योजना जरूरी है।
विजेंद्र गोले ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित 24 परिवारों को तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए, ताकि वे स्थायी रूप से अपने घरों का पुनर्निर्माण कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जब मामला उच्च स्तर तक पहुंच चुका है, तब भी ठोस कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा गरीबों की तुलना में संपन्न वर्ग को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। उनके अनुसार, यदि इसी प्रकार की घटना किसी बड़े उद्योगपति या पूंजीपति के साथ होती, तो तत्काल बड़े स्तर पर आर्थिक सहायता और पुनर्वास की घोषणा की जाती। जबकि गरीब परिवारों को तात्कालिक राहत देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि जनता ने सरकार को इसलिए चुना है कि संकट के समय उसे मजबूती से सहारा मिल सके, लेकिन वर्तमान स्थिति में पीड़ित परिवार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
बर्राढाना अग्निकांड ने 24 परिवारों का आशियाना छीना है, लेकिन आपदा प्रबंधन और पुनर्वास की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इन परिवारों के पुनर्वास के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाती है।




