ब्रह्म ही सत्य, संसार मिथ्या: प्रिया चौधरी।

भारत भ्रमण कर शंकराचार्य जी ने किया सनातन धर्म का पुनरुत्थान: मधु चौहान। आदि गुरु शंकराचार्य के विचार आज भी है प्रासंगिक रूपलाल महाराज । आदि गुरु शंकराचार्य जयंती पखवाड़ा अंतर्गत सी एम सी एल डी पी कक्षा में कार्यक्रम आयोजित""

आठनेर। आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत रविवार को मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड आठनेर के निर्देशन में चलने वाली मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम क्लास में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें उनके अद्वितीय कार्यों को नमन करते हुए उनके धर्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति के प्रति अतुलनीय योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद जिला बैतूल की जिला समन्वयक प्रिया चौधरी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने अल्पायु में ही संपूर्ण भारत का भ्रमण कर सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की और अद्वैत वेदांत के माध्यम से समाज को एकता का संदेश दिया।उन्होंने चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ किया।उन्होंने विश्व को बताया कि ब्रह्म ही सत्य है संसार मिथ्या है।शंकराचार्य जी के जीवन चरित्र के संबंध में जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड आठनेर की विकासखंड समन्वयक मधु चौहान ने बताया कि शंकराचार्य जी का जन्म लगभग 788 ई. में केरल के कालड़ी नामक स्थान पर हुआ था।उनके पिता शिवगुरु और माता जी का नाम आर्याम्बा था।

कम उम्र में ही वेदों और शास्त्रों का गहरा ज्ञान प्राप्त कर लिया था।आठ वर्ष की आयु में संन्यास ग्रहण कर लिया था।उनके गुरु गोविन्द भगवत्पाद जी थे।उन्होंने भारत भर में भ्रमण कर सनातन धर्म का पुनरुत्थान किया।प्रसिद्ध भागवत कथावाचक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रूपलाल महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि शंकराचार्य जी ने लिखे प्रमुख ग्रंथ विवेकचूडामणि,भजगोविंदम्,उपदेश साहस्री है।उन्होंने उपनिषद,भगवद गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखे।लगभग 32 वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने इस नश्वर शरीर का त्याग कर दिया।शंकराचार्य जी का जीवन केवल आध्यात्मिक नहीं,बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक रहा।उनके विचार आज भी प्रासंगिक है जो समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

कार्यक्रम अंत में सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।कार्यक्रम में मुख्य रूप से ताप्ती प्रभास नागरिक संस्था सावंगी के अध्यक्ष दिनेश माकोड़े,भवर्थ जन कल्याण संस्था आठनेर के अध्यक्ष कैलाश आजाद, समाजसेवी आशुतोष सिंह चौहान,परामर्शदाता दिनेश साकरे,अंकित सातपुते, दीपाली पातुलकर,राधिका बारपेटे सहित बड़ी संख्या में सी एम सी एल डी पी छात्र-छात्राए एवं ग्राम विकास समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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