बैतूल में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों की बैठक, उग्र आंदोलन की चेतावनी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दो साल में टीईटी पास करना जरूरी। सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग।

बैतूल। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में रविवार को प्रभात पट्टन विकासखंड में विभिन्न शिक्षक संगठनों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अध्यापक शिक्षक संघर्ष समिति के संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया और जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा पास नहीं करने पर शिक्षकों को क्रमोन्नति और पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, परीक्षा में असफल रहने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

शिक्षकों ने बैठक में कहा कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1998 से 2013 के बीच हुई थी और उस समय वे सभी निर्धारित योग्यताओं को पूरा कर चुके थे, साथ ही व्यापम परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। ऐसे में कई वर्षों बाद TET अनिवार्य करना अनुचित है। इस निर्णय से शिक्षकों में आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है।

संयुक्त मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए या टीईटी में छूट दी जाए। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा में असफल होने पर नौकरी जाने का खतरा बना हुआ है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। इसी को लेकर सभी शिक्षक संगठन एकजुट होकर सरकार से संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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