बीजासनी माता मंदिर के घट विसर्जन में ।

मां का मां से हुआ मिलन । पूजा अर्चना आरती क्षमा प्रार्थना एवं जयकारों के साथ हुआ घट विसर्जन । बीजासनी मंदिर समिति के सेवादारों में तरुण एवं किशोर युवाओं की भागीदारी की सर्वत्र चर्चा । बीजासनी मंदिर का भंडारा है सामाजिक समरसता का श्रेष्ठ उदाहरण । ज्योत एवं घट सेवा में रखा जाता है पवित्रता का विशेष ध्यान । प्रतिवर्ष बढ़ रही है अखंड ज्योतों की संख्या , इस वर्ष चैत्र नवरात्र में 391 अखंड ज्योत । आस्था एवं शक्ति का प्रतीक बीजासनी मंदिर , बैतूल गंज है सिद्धपीठ।

बैतूल। बैतूल गंज स्थित बीजासनी माता मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव धूमधाम एवं अत्यंत हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ। एकम के दिन अत्यंत विधिविधान से घी एवं तेल की 391 अखंड ज्योत मंत्रोच्चार से प्रज्ज्वलित कर पूजन कर घट स्थापित किए गए जिनकी सेवा मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा पूरे नियम पवित्रता एवं भक्ति के साथ की गई। प्रतिदिन सायंकालीन महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए एवं भक्तिभाव के साथ मां को अर्जी लगाई। अष्टमी के दिन दुर्गासप्तशती का हवन विधिविधान से सम्पन्न हुआ तथा नवमी के दिन लगभग 7 हजार से अधिक धर्मप्रेमियों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर संस्थापक एवं समिति अध्यक्ष पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि नवरात्र का नवां दिन मां सिद्धिदात्री का होता है तथा नौ दिनों की साधना का फल मां सिद्धिदात्री नवें दिन रात्रि को आकर देती है इसीलिए घट विसर्जन दशमी को किया जाता है यही कारण है कि श्रद्धालु बीजासनी मंदिर से जुड़े भक्तगण व्रत दशमी को छोड़ते हैं तथा घट विसर्जन भी इसी दिन किया जाता है, उन्होंने बताया कि जवारे माता का स्वरूप होते हैं एवं दशमी के दिन वास्तव में मां की बिदाई नहीं की जाती अपितु माता का मां ताप्ती से मिलन करवाया जाता है। बीजासनी मंदिर द्वारा प्रतिवर्ष घट विसर्जन खेड़ी ताप्ती घाट पर किया जाता है जहां ज्वारों के रूप में माता सूर्यपुत्री मां ताप्ती जी से मिलती है, पूरे विधिविधान से प्रार्थना आरती एवं क्षमाप्रार्थना के उपरांत उन्हें श्रद्धा समर्पण के साथ भावपूर्ण बिदाई दी गई। मंदिर समिति की ओर से उन्होंने समस्त धर्मप्रेमियों को कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु धन्यवाद प्रेषित किया है।

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