150 वर्षों से आठनेर में विराजमान सटवाई देवी, शास्त्रों में मिलता है उल्लेख।
आचार्य रविन्द्र मानकर ने बताई सटवाई देवी और बगलामुखी माता की दिव्य महिमा।

बैतूल। आठनेर के प्राचीन सटवाई देवी मंदिर में पावन चतुर्थी 22 मार्च को विशाल भंडारे के साथ धार्मिक आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन आठनेर निवासी संजय कुमार खंडागले की सेवानिवृत्ति उपलक्ष्य में किया गया। उन्होंने मध्यप्रदेश विद्युत मंडल आठनेर में 18 मई 1989 से सेवा शुरू की थी और 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हुए। सेवा पूर्ण होने पर उन्होंने मां सटवाई देवी के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भंडारे का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना से हुई और इसके बाद मंदिर परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा। माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। आचार्य मां बगलामुखी सिद्ध साधक रविन्द्र मानकर ने प्रवचन में बताया कि सटवाई देवी आठनेर में लगभग 150 वर्षों से विराजमान हैं और देवी भागवत पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, शिवपुराण, नवम स्कंध तथा सोमवेद में इनका उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि सटवाई देवी नवजात शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो जन्म के बाद शिशु की रक्षा कर उनके जीवन का भाग्य लेखन करती हैं।
आचार्य रविन्द्र मानकर ने बताया कि मूल प्रकृति के छठे अंश से अवतरित होने के कारण इन्हें षष्ठी देवी कहा जाता है और देवलोक में देवसेना, ब्रह्ममाया व सर्वोतमा देवी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वे ब्रह्मा की मानस कन्या, दक्ष प्रजापति की पुत्री, भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की पत्नी तथा सूर्य पत्नी संज्ञा देवी की मातृका हैं। मंदिर समिति सदस्य अरुण खंडागले ने बताया कि मंदिर में सटवाई देवी अपनी छोटी बहन जीविका देवी के साथ प्रतिष्ठित हैं और 16 मातृकाओं में घटी देवी का विशेष स्थान है। इस अवसर पर देवी का प्रागट्य उत्सव भी आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने में श्रद्धालुओं व सेवकों का योगदान रहा।




