जीवात्मा महात्मा के माध्यम से परमात्मा को प्राप्त करता है: पं निर्मल कुमार शुक्ल।

बैतूल। वैसे तो जीव ब्रह्म का अंश है। दोनो अनादि काल से एक दूसरे से अभिन्न हैं किन्तु माया के प्रभाव में जीवात्मा और परमात्मा में दूरियां दिखाई पड़ती हैं। जैसे जब बादलों से जल गिरता है तो मार्ग में तो स्वच्छ और निर्मल रहता है किन्तु जैसे ही धरती का स्पर्श होता है वह मटमैला हो जाता है उसी प्रकार जीवात्मा जब तक माता के गर्भ में रहता है तब तक परमात्मा का दर्शन होता है किन्तु धरती पर जन्म लेते ही माया उसे अपने जाल में फंसा लेती है और वह अपने अनादि काल के हितैषी परमात्मा को भूलकर जगत प्रपंच में उलझ जाता है। न्यू बैतूल स्कूल ग्राउंड में चल रही नौ दिवसीय श्री हनुमत कथा के तृतीय दिवस मानस महारथी पं निर्मल कुमार शुक्ल ने उक्त उद्गार व्यक्त किए।

हनुमान जी का मंगल मय चरित्र सुनाते हुए आप ने कहा कि सुग्रीव का राज पाट पत्नी परिवार सब बालि ने छीन लिया और लात मारकर उसे घर के बाहर भगा दिया। सब कुछ छूट जाने पर भी सुग्रीव ने हनुमान जैसे संत का साथ नहीं छोड़ा उनके सानिध्य में रह कर किष्किंधा पर्वत पर समय व्यतीत करता रहा। माता सीता को खोजते हुए जब भगवान राम शबरी का निर्देश पाकर किष्किंधा के पास पंहुचे तो पर्वत पर बैठा सुग्रीव उन्हें देखकर भयभीत हो उठा।उसे लगा ये कोई बाली के भेजे हुए गुप्त चर हैं हनुमान जी को इन दोनों का परिचय पाने के लिए भेजा और बोला कि अगर वो बालि के भेजे गुप्तचर होंगे तो वहीं से संकेत कर देना ताकि मैं इस पर्वत से भाग जाऊं। हनुमान जी ब्राह्मण वेष बनाकर गये और भगवान श्री राम का परिचय प्राप्त करके उन्हें अपनी पीठ पर बैठा कर सुग्रीव के पास लाए तथा अग्नि के साक्षी में सुग्रीव और राम की मित्रता करा दिए।इस प्रकार जीवात्मा और परमात्मा का मिलन हो गया। हनुमान जी जीव को भगवान तक पहुंचाने का कार्य करते हैं किन्तु कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें लेकर भगवान तक पहुंचाते हैं। राम को अगर सुग्रीव के पास ले गए तो विभीषण को राम के पास ले गए। जब तक हनुमत कृपा नहीं होगी तब तक राम दर्शन असंभव हैं क्योंकि।राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे। वैसे परमात्मा को पाने के लिए सबसे पहले घर बार के भोगों का त्याग करना पड़ता है किन्तु हनुमान को माध्यम बनाकर अगर भगवान को पाना चाहें तो एक भोग और भगवान दोनों से मिला देते हैं। तुम्हरे मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भै सब जग जाना। हनुमान जी के लिए जगत में कुछ दुर्लभ नहीं है। महराज श्री ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि जिसे हनुमान जी ने बसा दिया उसे उजाड़ने की ब्रह्मा में भी नहीं है लेकिन यदि हनुमान ने उजाड़ दिया तो ब्रह्मा भी उसे बसाने में असमर्थ हो जाते हैं।जिस पर हनुमान जी की कृपा हो जाती है उस शिव पार्वती राम सीता और लक्ष्मण अनुकूल हो जाते हैं। कथा के यजमान राजेश अवस्थी और संगीता अवस्थी ने समस्त क्षेत्रीय श्रद्धालु जनों से हजारों की संख्या में पधारकर कर कथामृत पान करने का आग्रह किया है। कथा में नगर के गणमान्य लोगों सहित विशाल संख्या में श्रोताओं का आगमन हो रहा है। यह कथा गंगा 27 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6 बजे तक प्रवाहित होगी।

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