दुष्यंत संग्रहालय मप्र का एनलाल जैन सम्मान डॉ. प्रवीण गुगनानी को ।

बैतूल। विगत संध्या को भोपाल साहित्य जगत के चमकते हुए संस्थान दुष्यंत पांडूलिपि संग्रहालय में एनलाल जैन स्मृति सम्मान का कार्यक्रम संपन्न हुआ। वर्ष 2026 का एनलाल जैन सम्मान साहित्य जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बैतूल के डॉ. प्रवीण दाताराम गुगनानी को दिया गया। स्मरणीय है कि प्रवीण गुगनानी मप्र साहित्य से राष्ट्रीय सम्मान अटलबिहारी सम्मान प्राप्त साहित्यकार हैं। प्रवीण जी की बारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं व दो पुस्तकों का संपादन उन्होंने किया है। स्तंभलेखन के क्षेत्र में भी इनका बड़ा नाम है व देश भर के समाचार पत्रों में इनके आलेख निरंतर प्रकाशित होते हैं। इस संदर्भ मे बोलते हुए कार्यक्रम के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, मप्र, मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि प्रवीण जी के लिए यह सम्मान समारोह आयोजित किया जाना सामयिक व सार्थक ही है। श्रीवास्तव जी ने प्रवीण गुगनानी की शीघ्र आ रही पुस्तक ‘बेसुआ’ पर भी व्यापक चर्चा की, उन्होंने कहा कि गिरमिटिया मजदूरों पर आ रहा यह उपन्यास अंग्रेज़ों के अत्याचारों को नए चश्मे से दिखाता है।

कार्यक्रम मे उपस्थित मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि कुछ समय पूर्व संगठन ने मप्र सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद लिए प्रवीण गुगनानी का नाम प्रस्तावित किया था किन्तु बाद मे पता चला कि वे सिंधी नहीं अपितु क्षत्रिय पंजाबी हैं। श्री मुक्तिबोध ने प्रवीण गुगनानी के संदर्भ मे कहा कि लेखन मे उनकी वर्षों की निरंतरता ने उन्हें विलक्षण लेखक बना दिया है। श्री मुक्तिबोध ने समाज एवं राष्ट्र के स्वबोध हेतु साहित्य की भूमिका के विषय में व्यापक प्रकाश डाला व संस्थान से आग्रह किया कि भविष्य में भी इस प्रकार वे साहित्य एवं समाज से संबद्ध कार्यक्रमों की चर्चा करते रहें।

संस्थान के अध्यक्ष निदेशक ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं सम्मान के मानदंडों की चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि किस प्रकाश प्रवीण गुगनानी इस सम्मान के लिए दुष्यंत संस्थान की ज्यूरी को सर्वथा उपयुक्त लगे।

संस्थान की निदेशक करुणा राजुरकर ने एनलाल जैन जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। श्रीमती करुणा ने एनलाल जैन की स्मृति में दिए जाने वाले इस सम्मान के विषय में भी विस्तार से चर्चा की। भोपाल की सभीको साहित्यिक संस्थाओं के पदाधिकारी व अनेक साहित्यकार आयोजन मे उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम मे दुष्यंत संग्रहालय के अध्यक्ष रामराव वामनकर व निदेशक करुणा राजूरकर भी मंचस्थ रहे। आभार प्रदर्शन विशाखा जैन ने किया।

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