आठनेर जनपद पंचायत में गड़बड़ियों का आरोप, शिकायत के बाद भी महीनों फाइलों में दबी रही जांच । आरटीआई में खुलासा: पुलिया निर्माण की जांच में दस्तावेज नदारद, केवल तस्वीरों के सहारे तैयार प्रतिवेदन।

बैतूल। काम शुरू नहीं हुआ फिर भी 9600 रुपये खर्च दिखाए जाने और जांच में जरूरी दस्तावेज नदारद होने से आठनेर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत ऊमरी में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतकर्ता विशाल भालेकर ने 30 सितंबर 2025 को जनपद पंचायत आठनेर में लिखित शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी की लापरवाही के कारण यह शिकायत महीनों तक फाइलों में दबी रही और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जनपद स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से परेशान होकर शिकायतकर्ता विशाल भालेकर को मुख्यमंत्री सहायता पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी पड़ी। इसके बाद जनपद पंचायत प्रशासन हरकत में आया और जांच दल गठित करने का आश्वासन दिया गया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
जांच में सामने आया कि नानू के घर से बिसराम के घर तक नाली निर्माण के लिए 0.88 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन विवाद के कारण यह कार्य शुरू ही नहीं हो सका। इसके बावजूद रिकॉर्ड में 9600 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं, जिन्हें वसूली योग्य बताया गया है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ तो राशि खर्च कैसे दिखा दी गई और यदि यह राशि वसूली योग्य है तो अब तक सरपंच और सचिव से इसकी वसूली क्यों नहीं की गई।
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार लीलाधर वागद्रे के खेत के पास बनी पुलिया को लेकर तैयार किए गए जांच प्रतिवेदन में केवल अधिकारियों द्वारा ली गई तस्वीरें ही संलग्न की गई हैं। पुलिया निर्माण से जुड़े स्वीकृति आदेश, टीएस, एएस, बिल-वाउचर और भुगतान से संबंधित दस्तावेज जांच रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और क्या जरूरी दस्तावेजों को सामने लाए बिना सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं कि कहीं सरपंच और सचिव को बचाने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया को कमजोर तो नहीं किया जा रहा।
शिकायतकर्ता विशाल भालेकर ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और शासकीय राशि की तत्काल वसूली सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना मुश्किल होगा और जनता के टैक्स का पैसा इसी तरह कागजों में खर्च होता रहेगा।




