आयुष के कर्मचारियों ने सीखा च्यवनप्राश और वात शामक तेल बनाना । दो दिन के प्रशिक्षण में पारंपरिक औषधि निर्माण का दिया प्रशिक्षण।

बैतूल। आयुष विभाग बैतूल अपने नवाचारों के माध्यम से कार्य में गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में लगातार नई गतिविधियां आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में विभाग ने कर्मचारियों को पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण का प्रायोगिक प्रशिक्षण देते हुए च्यवनप्राश और वात शामक तेल का प्रयोगात्मक निर्माण कराया।
जिला आयुष अधिकारी डॉ. योगेश चौकीकर के मार्गदर्शन में आयुष विभाग बैतूल में यह प्रशिक्षण 10 और 11 मार्च को आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को औषधि निर्माण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में वृद्धि हो सके।
डॉ. योगेश चौकीकर ने बताया कि किसी भी कार्य में कुशलता प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से आयुष विभाग समय-समय पर कर्मचारियों के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित करता है, ताकि वे पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण की प्रक्रिया को समझते हुए उसे व्यवहार में भी उतार सकें।
प्रशिक्षण के दौरान रस शास्त्र की विशेषज्ञ डॉ. अर्चना आसरेकर और आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्ञानेश्वर झारबडे ने चिकित्सालय के सहकर्मियों के साथ मिलकर च्यवनप्राश निर्माण और वात शामक तेल का प्रयोगात्मक निर्माण कराया। इस दौरान प्रदीप भारतद्वाज, कमलेश चौकीकर, कैलाश मालवीय सहित चिकित्सालय के अन्य कर्मचारियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेकर निर्माण प्रक्रिया में योगदान दिया।




