Memorandum will be submitted to SP: मांझी सरकार के सैनिकों को आतंकवादी बोलने पर आक्रोश, एसपी को सौंपा जाएगा ज्ञापन 

बैतूल। चोपना थाना क्षेत्र के ग्राम विष्णुपुर में बीते दिनों मांझी सरकार संगठन के सदस्यों पर घर में घुसकर मारपीट, अभद्रता और लूट के झूठे आरोप लगाए गए थे, जिसकी शिकायत चोपना थाने में दर्ज कराई गई थी। लेकिन जब इस मामले की गहराई से जांच की गई, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। दरअसल, आदिवासी समाज की एक युवती बंगाली युवक के साथ चली गई थी, जिसे वापस लाने के लिए मांझी समाज के सैनिक उसके पिता के आग्रह पर गए थे। इस संबंध में सैनिकों ने पुलिस को भी सूचना दी थी, लेकिन इसके बावजूद मांझी सरकार के सैनिकों पर झूठे आरोप लगाए गए।

मांझी सरकार के भारत प्रतिनिधि ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि संगठन की छवि खराब करने के लिए गलत तरीके से सैनिकों को आतंकवादी बताया जा रहा है, जबकि उन्होंने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस को जानकारी देकर कदम उठाया था।

– पुलिस की भूमिका संदिग्ध

मांझी सरकार के ब्रांच अध्यक्ष भोंदू परते ने बताया कि जब सैनिक युवती को लेने गए, तब उन्होंने पहले चोपना और शाहपुर थाने में इसकी सूचना दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने कोई सहयोग नहीं किया, और अब सैनिकों को ही बदनाम किया जा रहा है। भोंदू परते ने कहा, 72 में आए बंगाली लोग हमारे ऊपर राज कर रहे हैं, हमारी बहन-बेटियों को उठा रहे हैं, और जब हम उन्हें वापस लाने जाते हैं, तो हमारे ऊपर ही झूठे आरोप लगा दिए जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यदि बिना सूचना दिए जाते, तो यह पुलिस के लिए कहने की बात होती, लेकिन सैनिकों ने पहले से सूचना दी थी, इसके बावजूद पुलिस साथ नहीं गई। अब जब सैनिकों ने अपना कर्तव्य निभाया, तो उन्हें ही दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है।

– एसपी बैतूल को सौंपा जाएगा ज्ञापन, मांझी सैनिक लामबंद

इस मामले में मांझी सरकार संगठन ने कड़ा विरोध जताया है और इसे सैनिकों को बदनाम करने की साजिश बताया है। संगठन ने पुलिस अधीक्षक बैतूल को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिला बैतूल के सभी मांझी सैनिकों को 10 फरवरी की सुबह 10 बजे मांझी नगर हमलापुर जिला कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

संगठन का कहना है कि न्यूज़ पेपर में सार्वजनिक रूप से आतंक जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मांझी सैनिकों की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। मांझी सरकार के सैनिकों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे हमें ही लड़ना होगा।

भोंदू परते के अनुसार, पाढर कार्यालय द्वारा 5 फरवरी को पुलिस चौकी को सूचना दी गई थी कि ग्राम विष्णुपुर के कुछ ग्रामीण और मांझी सैनिक युवती को वापस लाने जा रहे हैं। इस पर बबलू वाडीवा ने भी 4 फरवरी को कंगला मांझी सरकार सैनिक संस्था पाढर कार्यालय को सूचित किया था कि ललिता वाडीवा को वापस लाने के लिए संगठन का सहयोग चाहिए।

– समाज को जागरूक होने की जरूरत

मांझी सरकार संगठन का कहना है कि आदिवासी समाज को अब जागरूक होने की जरूरत है। संगठन के नेताओं ने कहा कि बाहर से आए लोग हमारी जमीन, हमारी बहन-बेटियों और हमारे अस्तित्व को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि समाज अपनी धरोहर बचाने के लिए एकजुट हो।

संगठन का कहना है कि इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। यदि पुलिस ने पहले ही सहयोग किया होता, तो यह विवाद खड़ा नहीं होता। अब मांझी सरकार के सैनिकों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस पूरे मामले में संगठन ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।

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