छात्रावासों में चपरासी संभाल रहे बच्चों की जिम्मेदारी

अधीक्षक आराम फरमा रहे घरों में, बच्चों की देखरेख पर उठे सवाल


बिना निरीक्षण, लापरवाही पर चुप्पी साधे हैं जिम्मेदार अधिकारी
बैतूल। जिले के छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों को अधीक्षकों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। देखने में आ रहा है कि कुछ छात्रावासों में अधीक्षक पद पर नियुक्ति के बावजूद अधीक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने में गंभीर नहीं हैं। शासन के नियमों को ताक पर रखकर ये अधीक्षक ब्लॉक या जिला मुख्यालयों में रहकर ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि छात्रावासों की देखभाल, भोजन, और स्वास्थ्य जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी चपरासियों पर छोड़ दी गई है।
नाम न बताने की शर्त पर एक चपरासी ने बताया कि अधीक्षक सप्ताह में केवल एक-दो बार छात्रावास आकर औपचारिक पूछताछ करते हैं और जरूरत का सामान अपनी गाड़ी में लाकर दे जाते हैं। रात में बच्चों की देखभाल का काम चपरासियों के कंधों पर छोड़ दिया जाता है। मजबूरी में वे सब सहते हैं क्योंकि अधिकारी उन पर ही दबाव बनाते हैं।
सूत्रों से पता चला है कि क्षेत्र के कई अधीक्षक अपनी लग्जरी कारों में बैतूल से ड्यूटी के नाम पर निकलते हैं और ब्लॉक मुख्यालय पर पान ठेलों, चाय की दुकानों और होटलों पर बैठे नजर आते हैं। जो अधीक्षक मुख्यालय में रहते हैं, वे बस स्टैंड पर आसानी से दिख जाते हैं। सवाल यह उठता है कि छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य इन लापरवाह अधीक्षकों के हाथ में कैसा होगा?
सूत्र यह भी बताते हैं कि इन अधीक्षकों को छुट भैया नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण अधिकारी भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं। नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारियों को बिना सूचना दिए छात्रावासों का निरीक्षण करना चाहिए और लापरवाह अधीक्षकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह काम करेगा कौन? जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी से छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। शासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और छात्रावासों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

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