सपने में आया प्रिय अनुज अम्बे बाबा लेखनी पुत्र !

व्यंग्य एपिसोड 2

 पता नही ऐसा कौनसा हुनर है मेरे छोटे भाई में हमेशा बड़े भाईयो की इज्जत उतारने के लिए तैयार रहता है, कही कुछ भी हो हमेशा अपने बड़े छोटे भाईयो को बीच में लेके आता है ताकि उसकी जेब भरी रहे, सूचना का खेल करके अवैध पैसा उगाही में वो भी कम नही है, अपने शातिर अंदाज से प्यार प्यार से लोगो के साथ बैठ के उनके भेद निकालकर उनको ही बाद में काटने का हुनर बखूबी आता मेरे अनुज अम्बे को, आज बड़े बड़े दिग्गजों में नाम है उसका !

 

जुआ सट्टा कमीशन खाना और सेटिंग कराने में माहिर है मेरा अनुज अम्बे बाबा क्योंकि, उसके बड़े अधिकारीयो से करीबी संबंध है चाहे फिर वो किसी भी विभाग के क्यों ना हो।

मन का काला और जबान का मीठा … लेकिन कभी भी किसी पर अन्याय होता नही देख सकता पर दूसरे को न्याय दिलाने के बीच में अपनी रोटी सेंक लेता . भले ही अनुज अम्बे बाबा की नजरो में बड़े बूढो की इज्जत न हो लेकिन दुनिया के लिए वो आदर्श इंसान है…… शायद भगवान उसे ईमानदारी की राह पर चलने की समझ दे क्योंकि किसी को तो जवाब देना होगा आज नही तो कल …

धन्यवाद ।

यह व्यंग्य पूर्णतः काल्पनिक है इसकी किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है ।

ऋषि सहगल, आमला

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