Maang : मुख्यमंत्री विवाह निकाह योजना में शामिल नहीं हो पाएंगे आदिवासी जोड़ें
सामूहिक विवाह माह अप्रैल, मई, जून में आयोजित करने की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बैतूल। समस्त आदिवासी समाज संगठन ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह, निकाह योजना की निर्धारित तिथियों को परिवर्तित करने की मांग की है। संगठन ने जिले के जनजाति समुदाय की संस्कृति एवं रीति रिवाजों को आधार मानते हुए चैत्र नवरात्रि के बाद अप्रैल, मई माह की तिथियों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह, निकाह आयोजित करने का आग्रह किया।
संगठन के जिला अध्यक्ष सुंदरलाल उईके ने बताया कि बैतूल आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां पर सम्पूर्ण आदिवासी समाज रीति रिवाज, नेग, नियम व संस्कृति के आधार पर विवाह करता है। आदिवासी समुदाय अपने पुरखा संस्कृति का अनुसरण करता है जनजाति समुदाय में विवाह संबंधी कार्य चैत्र नवरात्र के बाद ही शुभ माना जाता है। इसलिये आदिवासी समुदाय हमेशा अपने परिवारों में विवाह संबंधी कार्यों को माह अप्रैल, मई, जून में आयोजित करते है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह / निकाय योजना के संबंध में तिथि निर्धारण कर जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों को प्रेषित की गई है, जिसमें संयुक्त रूप से विवाह आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में निर्धारित तिथियों में यदि विवाह समारोह आयोजित किये जाते है तो आदिवासी समुदाय के जोडे सम्मिलित नहीं हो पाएंगे।
आदिवासी समाज में माह के महीने में नहीं होती है शादी

भुमक संघ जिला अध्यक्ष मदन चौहान ने बताया कि आदिवासी समाज माह के महीने में शादियां नहीं करते है और न ही शादी सम्बंधी रिश्तों की भी चर्चा नहीं करते। आदिवासी समाज में चांद (उदय) से अमावस्या तक सम्पूर्ण माह माना जाता है। जबकि हिन्दू संस्कृति में पूर्णिमा के दूसरे दिन से ही माह परिवर्तित हो जाता है। वर्तमान माह में शिवरात्रि पर्व में महादेव को पूजा जाता है, इस अवधि में पचपावली त्योहार होने से शादी संबंधी सभी कार्य सम्पन्न नहीं किये जाते है। उपरोक्त स्थिति को ध्यान में रखा जाय तो शासन की इस योजना का लाभ पाने से आदिवासी समाज के अधिकतर जोडे वंचित रह जाएंगे।
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माह फरवरी और मार्च में निर्धारित है सामूहिक विवाह की तिथि
जनपद पंचायत आमला, घोडाडोगरी, शाहपुर, चिचोली, प्रभातपटटन, मुलताई में विवाह समारोह के कार्यक्रम की तिथि माह फरवरी और मार्च 2023 में निर्धारित है। जनजाति समुदाय की संस्कृति के आधार पर इस समय विवाह संबंधी कार्य करना उचित नहीं है। श्री धुर्वे ने बताया कि सामूहिक विवाह में जो भी आदिवासी जोड़ा शादी कर लेता है, वे जोड़े पुनः आदिवासी संस्कृति से विवाह करते है। ऐसी स्थिति समस्त आदिवासी समाज संगठन ने कलेक्टर से आग्रह किया कि जिले के सभी विकासखण्डों में आदिवासी जोड़ों का विवाह आदिवासी भुमकाओं से आदिवासी संस्कृति से संपन्न करवाया जाए। इसके लिए समस्त मुख्यकार्यपालन अधिकारी / मुख्य नगरपालिका अधिकारी / नगरपालिका / नगर परिषद को निर्देशित किया जाए। कलेक्टर ने भगत भुमकाओं के द्वारा विवाह कराने का आश्वासन दिया हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में समस्त आदिवासी समाज संगठन के जिला अध्यक्ष सुन्दरलाल उइके, भुमक संघ के जिला अध्यक्ष मदन चौहान, वरिष्ठ समाजसेवी योगेश धुर्वे, मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिंह इवने उपस्थित थे।




