140 crore scheme: 140 करोड़ की योजना में भारी गड़बड़ी, 20 हजार किसानों का भविष्य दांव पर, किसानों को हो रहा 225 करोड़ प्रति वर्ष नुक़सान
जिला पंचायत सदस्य, युवा मोर्चा पूर्व जिला अध्यक्ष सहित किसान नेताओं ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बैतूल। जिले की पारसडोह मध्यम उद्वहन सिंचाई परियोजना में भारी अनियमितताओं और अधूरे कार्यों के चलते 42 गांव के किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाड़े, पूर्व भाजपा युवा मोर्चा के भवानी गावंडे, किसान नेता मकरध्वज सूर्यवंशी, गुलाब देशमुख, चिंताराम हरोडे और अन्य नेताओं के नेतृत्व में यह ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
विगत 6 वर्षों से निर्माणाधीन पारसडोह सिंचाई परियोजना से 45 ग्रामों के 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का वादा किया गया था। परंतु पिछले 5 वर्षों से पानी तो संग्रहित किया जाता है, परंतु किसानों को पूर्ण और व्यवस्थित सिंचाई नहीं मिली है। इस कारण किसानों की फसलें सूख रही हैं और उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कृषकों की इस महत्वपूर्ण मांग पर ध्यान न दिया गया तो बैतूल जिले में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। पारसडोह सिंचाई परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए शासन और प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। चूंकि किसानों द्वारा सैकड़ो बार प्रशासन को ज्ञापन देकर निवेदन किया जा चुका है। किसानों का आरोप है कि ठेकेदार और सिंचाई विभाग ने झूठे आंकड़े प्रस्तुत कर किसानों को झूठे सिंचाई बिल थमा दिए हैं। किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण उनकी गेहूं की फसलें सूख जाती हैं, और पाइपलाइन की टूट-फूट से उनकी जमीनें नष्ट हो रही हैं। विभाग और ठेकेदार के कुप्रबंधन के कारण किसी भी ग्राम में एक पलेवा तीन पानी नहीं दिया गया है।
— योजना से लाभ नहीं, बल्कि घाटा–
किसानों ने कहा कि योजना से शासन और जनता को कोई लाभ नहीं मिला है, बल्कि बिजली बिल के रूप में प्रतिवर्ष शासन पर लगभग 4 करोड़ रुपये का भार आ गया है। योजना घाटे में चल रही है और बंद होने की कगार पर आ गई है। योजना की सबसे प्रमुख गड़ी पाइपलाइन भी निश्चित गहराई में नहीं गड़ी गई है, जिससे खेतों की जुताई करते वक्त पाइपलाइन टूट जाती है।
— आंदोलन की चेतावनी–
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि योजना की अव्यवस्थाएं दूर नहीं की गईं तो 42 गांव के 20 हजार किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि बिना सूचना के मोटर पंप चालू किए जा रहे हैं, जिससे उनकी खेती की सिंचाई नहीं हो रही है और पानी नदी-नालों में व्यर्थ बहा दिया जाता है।
— यह है किसानों की मांगें–
ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि अधूरे कार्य को पूरा किए बिना योजना को शासन को न सौंपा जाए और ठेकेदार को एनओसी न दी जाए। साथ ही, विभाग को बिंदुवार जांच कराकर संबंधित ग्राम की सिंचाई का निरीक्षण करने की अपील की गई है ताकि किसानों को न्याय मिल सके और उनके नुकसान की भरपाई हो सके।




