चुनालोहमा में मनरेगा मजदूरों के शोषण का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत
सरपंच-सचिव और ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग

बैतूल। विकासखंड भीमपुर की ग्राम पंचायत चुनालोहमा में मनरेगा के तहत चल रहे निर्माण कार्यों में मजदूरों की मजदूरी को लेकर गंभीर अनियमितताओं और आर्थिक शोषण के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर सरपंच, सचिव और ठेकेदार की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कथित गड़बड़ी पिछले चार वर्षों से जारी है और मजदूरों को सरकारी दर के अनुरूप पूरी मजदूरी नहीं मिल रही है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मजदूरों को यह कहकर डराया जाता है कि यदि उन्हें 300 रुपए की पूरी मजदूरी चाहिए तो राशि उनके बैंक खाते में आएगी, लेकिन भुगतान आने में करीब एक वर्ष लग सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक इसी मजबूरी का फायदा उठाकर ठेकेदार मजदूरों को हर सप्ताह नकद भुगतान करने की बात कहता है। आरोप है कि इस नकद भुगतान में महिलाओं को केवल 200 रुपए और पुरुषों को 250 रुपए प्रतिदिन दिए जाते हैं, जबकि सरकारी दर के अनुसार मजदूरों को पूरी मजदूरी मिलनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा मजदूरों को पहले ही कुछ नकद राशि देकर मामले की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति से साझा नहीं करने की हिदायत दी जाती है। शिकायत में दावा किया गया है कि जो मजदूर वास्तव में काम करते हैं, उन्हें केवल नकद राशि दी जाती है, जबकि उनके नाम पर स्वीकृत मजदूरी की राशि कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम से निकाली जाती है। ग्रामीणों ने इसे वित्तीय गबन का मामला बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कथित अनियमितताओं से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी उनके पास मौजूद है, जिसमें मजदूरों की मेहनत की राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी सामने आती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से ग्राम पंचायत चुनालोहमा में पिछले चार वर्षों के मनरेगा कार्यों, मस्टररोल और मजदूरी भुगतान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि जांच के दौरान सभी मजदूरों को मिली और उनके नाम पर स्वीकृत मजदूरी का मिलान कर कथित रूप से बकाया राशि का हिसाब निकाला जाए तथा सरकारी दर के अनुसार उनका पूरा भुगतान कराया जाए। साथ ही गरीब मजदूरों के हक के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ करने वाले सरपंच, सचिव और ठेकेदार के खिलाफ जांच में आरोप प्रमाणित होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में मजदूरों के शोषण की पुनरावृत्ति न हो।
ज्ञापन देने वाले ग्रामीणों में दुर्गेश, दिपीका, संदीप, संगीता, अंकिता, सरस्वती, सुन्दर, सन्नू, कला, रुखमनी, पिंकी, बाबूलाल, समोती, सुमिना, शारदा, प्रीति और जसवन्ती सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की है।




