आठनेर में हर-हर महादेव के जयघोष के साथ निकली समरसता कावड़ यात्रा

आठनेर। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को आठनेर नगर में भक्ति, आस्था और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम देखने को मिला। कोलगांव स्थित ताप्ती तट से गुप्तेश्वर धाम तक निकली समरसता कावड़ यात्रा में सर्व समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथों में कावड़ और हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के जयघोष के साथ कावड़िए नगर की सड़कों से गुजरे तो पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
यात्रा का शुभारंभ कोलगांव ताप्ती तट से हुआ। यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर पवित्र ताप्ती जल कावड़ में भरा और भगवान महादेव के जलाभिषेक के लिए यात्रा प्रारंभ की। जैसे-जैसे कावड़ यात्रा नगर की ओर बढ़ी, श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने कावड़ियों का स्वागत किया और पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया।
यात्रा का समापन गुप्तेश्वर धाम में हुआ, जहां कावड़ियों ने भगवान शिव के शिवलिंग पर ताप्ती जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इसके बाद आरती और प्रसादी का आयोजन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया।
– समरसता बनी यात्रा की पहचान
समरसता कावड़ यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भी यात्रा में भागीदारी की। जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी श्रद्धालु एक साथ भगवान शिव की आराधना करते नजर आए। यही वजह रही कि यात्रा ने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया।
आयोजकों के अनुसार यह कावड़ यात्रा प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की भागीदारी एवं आयोजन का स्वरूप और अधिक व्यापक होता जा रहा है।
– सावन के अंतिम सोमवार पर जलाभिषेक
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। कावड़ यात्रा को भी श्रद्धा, संयम और भक्ति से जुड़ी धार्मिक परंपरा माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र नदियों या जल स्रोतों से जल लेकर उसे भगवान शिव को अर्पित करते हैं।
आठनेर में निकली यह समरसता कावड़ यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देती नजर आई।




