Corruption: भ्रष्टाचार का जरिया बनी स्वास्थ्य योजनाएं, छोटे इलाज के नाम पर भी दिए जा रहे लाखों के अनुमानित बिल
भ्रष्टाचार का जरिया बनी स्वास्थ्य योजनाएं, छोटे इलाज के नाम पर भी दिए जा रहे लाखों के अनुमानित बिल

बैतूल। सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं में भी अब ठगों और भ्रष्ट लोगों ने सेंध लगा दी है। योजना में भ्रष्टाचार का घुन लगता नजर आ रहा है। हाल ही में एक नागपुर के डॉक्टर द्वारा महज 10 से 15 हजार में होने वाले इलाज के नाम पर लाखों रुपए का अनुमानित बिल बना कर देने का मामला सामने आया है। इसकी शिकायत देशबंधु वार्ड निवासी आवेदक नरेंद्र छिपने द्वारा जनसुनवाई में की गई है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि ऑपरेशन और बीमारी के उपचार के लिए नागपुर के चिकित्सक डॉ. रघुवंशी द्वारा मुझे 50-60 हजार रूपये से अधिक राशि खर्च होने की जानकारी दी जा रही थी, उसी बीमारी का ऑपरेशन व उपचार पाढर अस्पताल में महज 13 हजार रूपये में निजी खर्च पर किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि नागपुर के चिकित्सक रघुवंशी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों को किस तरह अंधेरे में रखकर अधिक राशि वसूली जा रही है। आवेदक नरेंद्र ने बताया कि योजना के तहत 35 हजार रूपये स्वीकृत हुए। इसका उन्हें मैसेज आया था। जब उन्होंने डॉक्टर से ऑपरेशन के लिए कहा तो डॉक्टर द्वारा 20 हजार अतिरिक्त राशि की मांग की जाने लगी। जिसकी रिकार्डिंग भी उनके पास उपलब्ध है। डॉक्टर द्वारा उन्हें तीन-चार महीने परेशान किया गया। जिससे मरीज की हालत खराब हो गई। आवेदक ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि डॉ.के खाते में उक्त राशि आ गई हो तो उसे वसूला जाए। उनका उद्देश्य है कि डॉ. रघुवंशी द्वारा अन्य लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार न किया जाए। उन्होंने इस मामले की उचित जांच कर कार्यवाही करने की मांग की।
— यह है मामला–
आवेदक नरेंद्र ने बताया कि उनकी पत्नि कविता पवार के शिष्ठ (गठान) का उपचार नागपुर के चिकित्सक डॉ. शशिकांत रघुवंशी के पास चल रहा था। जिनका नागपुर में बिग बाजार के सामने लोकमत चौक पर क्लिनिक है।शशिकांत रघुवंशी मुले अस्पताल में प्रति बुधवार उपचार के लिए आ रहें है। उपचार के दौरान डॉक्टर ने उनकी पत्नी के ऑपरेशन के लिए कहा। जिसके लिए मौखिक रूप से कुल खर्च 28 हजार रूपये बताया था। आवेदक ने बताया कि उनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण डॉक्टर ने शासकीय योजना की जानकारी दी। डॉक्टर द्वारा उन्हें कहा गया कि आष्युमान कार्ड के तहत उपचार और ऑपरेशन नहीं हो सकता है। डॉक्टर ने ही मुख्यमंत्री सहायता के तहत उपचार कराने की सलाह दी थी। इसका 1 लाख 40 हजार रूपए का स्टीमेट भी बनाकर दिया था। इलाज के लिए 35 हजार स्वीकृत हुए थे। आवेदक को आशंका है कि स्वीकृत राशि डॉक्टर के खाते में स्थानांतरित हो गई हो। आवेदक ने कलेक्टर से इस मामले की जांच करवा कर कार्यवाही करने की मांग की।



