बौद्ध महासभा की बैठक में अम्बेडकर जयंती कार्यक्रमों पर बनी सहमति।
मऊ में 14 अप्रैल को कार्यक्रम को लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने का निर्णय। सम्राट अशोक के जीवन और बौद्ध धर्म के प्रसार पर वक्ताओं ने रखे विचार।

बैतूल। सम्यक बुद्ध विहार बडोरा में भारतीय बौद्ध महासभा जिला शाखा बैतूल द्वारा चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर पूज्य भंते दीपांकर के सानिध्य में मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय कार्यालय मुंबई और प्रदेश कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुसार डॉ बाबा साहब अम्बेडकर की जन्मस्थली महू में 14 अप्रैल को अन्यत्र पांडाल लगाने के संबंध में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने, महू में आयोजित कार्यक्रम में सहयोग व सहभागिता करने तथा स्थानीय स्तर पर अम्बेडकर जयंती कार्यक्रमों में भागीदारी को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिलाध्यक्ष अधिवक्ता नामदेव नागले द्वारा भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष मोमबत्ती प्रज्वलित कर नमन से हुई। उपस्थित अनुयायियों ने पुष्प अर्पित किए तथा सम्राट अशोक के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया।
इस दौरान जिला उपाध्यक्ष इंजीनियर प्रकाश उबनारे ने कहा कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद भगवान बुद्ध के सिद्धांतों से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म अपनाया और अपने पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को विभिन्न देशों में भेजकर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने भारत में 84 हजार बुद्ध विहारों का निर्माण और विश्वविद्यालयों की स्थापना कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध धर्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बैठक में जिलाध्यक्ष नामदेव नागले, प्रोफेसर डॉ एस डी डोंगरे, जिला महासचिव सहदेव पाटिल, तहसील कोषाध्यक्ष गीता नागले, जिला सचिव मधुकर पाटिल ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष काशीनाथ वाघमारे, जिला कोषाध्यक्ष तुलाराम चौकीकर, जिला सचिव प्रेमलाल अंबुलकर, सी नागले, जिला संघटक किशोर पाटिल, तहसील महासचिव जसवंती चौकीकर और धम्म उपासक श्याम पाटिल सहित अन्य उपस्थित रहे। अंत में जसवंती चौकीकर ने आभार व्यक्त किया।




