Corruption: सरपंच मनीष नरवरे पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, किरायेदारी में फर्जीवाड़े का खुलासा
पूर्व तारीखों में रसीद काटकर मनपसंद व्यक्तियों को दुकानें आवंटित करने का मामला

Corruption: बैतूल। ग्राम पंचायत झल्लार में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला उजागर हुआ है, जहां सरपंच मनीष नरवरे पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए पंचायत द्वारा निर्मित दुकानों को पूर्व दिनांक की किरायादारी रसीदें काटकर अपने मनपसंद व्यक्तियों को आवंटित किया है। इस मामले की शिकायत जनपद सदस्य क्षेत्र क्र. 7 जनपद पंचायत भैंसदेही की श्रीमती स्वाती मनीष राठौर ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से की है।
फर्जी रसीदों का खेल
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में बताया कि सरपंच मनीष नरवरे ने नवीन कॉम्प्लेक्स में पूर्व दिनांक की किराया रसीदें काटकर कूटरचना एवं धोखाधड़ी की है। उदाहरण के तौर पर, 13 मार्च 2024 को सतीश तायवाडे को और 10 फरवरी 2024 को खुशीराम मन्नासे को फर्जी रसीदें काटी गईं। इसमें दुकान क्र. 15 से 35,600 रुपये लेना था, लेकिन सरपंच द्वारा केवल 17,000 रुपये की रसीद काटी गई और शेष राशि माफ कर दी गई, जो कि अवैध है। अन्य दुकानों की रसीदें भी इसी तरह फर्जी तरीके से काटी गईं हैं, जिनका आधिकारिक रिकॉर्ड पंचायत कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।
किरायेदारी समाप्त नहीं करने का आरोप
ग्राम पंचायत झल्लार द्वारा निर्मित दुकानों का कई महीनों का किराया दुकानदारों ने जमा नहीं किया है। इसके बावजूद, ऐसे दुकानदारों की किरायेदारी समाप्त नहीं की गई है और सरपंच उनसे अवैध रूप से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। जनपद सदस्य क्षेत्र क्र. 7, श्रीमती स्वाती राठौर/मनीष राठौर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को शिकायत आवेदन में सरपंच मनीष नरवरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरपंच अपने पद का दुरुपयोग कर ग्राम पंचायत झल्लार की संपत्ति का फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरपंच मनीष नरवरे के विरूद्ध थाना झल्लार में अपराधिक मामला दर्ज किया जाए ताकि भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके और पंचायत की संपत्ति का सही उपयोग हो सके। शिकायतकर्ता जनपद सदस्य का कहना है कि पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किए गए इस तरह के कृत्य न केवल जनविश्वास को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि शासन और प्रशासन की साख पर भी सवाल उठाते हैं। अधिकारियों को इस मामले में गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।




