Grandparents Day celebrated at Mind’s Eye International School:बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दिखाया दादा-दादी का महत्व
कार्यक्रम ने भावनाओं को छुआ, आधुनिकता में पारिवारिक मूल्यों का दिया संदेश

Grandparents Day: बैतूल। माइंड्स आई इंटरनेशनल स्कूल ने 25 दिसंबर को ग्रैंडपेरेंट्स डे बड़े ही उत्साह और भावनात्मक माहौल में मनाया। इस खास दिन का उद्देश्य बच्चों और उनके दादा-दादी, नाना-नानी के रिश्तों की अहमियत को समझाना और समाज में बढ़ते एकल परिवारों के बीच इनकी भूमिका को उजागर करना था। स्कूल प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने दादा-दादी और नाना-नानी को सम्मानित कर उन्हें विशेष महसूस कराया। इस भव्य आयोजन में श्री अग्रसेन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के संचालक अनिल राठौर, डायरेक्टर डॉक्टर ओपी राठौर, श्रीमती निशा राठौर और दिनेश राठौर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सभी ने बच्चों और अभिभावकों के साथ इस दिन को विशेष बनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत रंगारंग प्रस्तुतियों से हुई। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने नाटिका और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए दर्शाया कि दादा-दादी और नाना-नानी के बिना जीवन अधूरा है। बच्चों की मासूम अदाओं और भावनात्मक प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया। डायरेक्टर डॉक्टर ओपी राठौर ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण और संस्कारों में दादा-दादी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में बच्चों को नैतिक शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों की जरूरत है। इसी कड़ी में श्रीमती निशा राठौर ने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी दोनों ही बच्चों के जीवन का अनमोल हिस्सा हैं और उनके साथ समय बिताने से बच्चों का विकास संपूर्ण होता है।

दिनेश राठौर ने शिक्षकों को इस दिन को प्रतिवर्ष मनाने के लिए साधुवाद दिया और कहा कि इस परंपरा को बनाए रखना बच्चों में पारिवारिक मूल्यों की समझ को मजबूत करेगा। संचालक अनिल राठौर ने बढ़ते एकल परिवारों के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि दादा-दादी बच्चों को संस्कार और अनुशासन सिखाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के साथ दादा-दादी का होना जीवन को संपूर्ण बनाता है। सचिव रिशांक राठौर ने कहा कि माइंड्स आई स्कूल सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और तहजीब सिखाई जाती है। उन्होंने बच्चों के जीवन में दादा-दादी और नाना-नानी के योगदान को अमूल्य बताया।

कार्यक्रम के समापन पर स्कूल की प्राचार्य श्रीमती रश्मि कमाविसदार ने सभी अतिथियों और दादा-दादी से अपील की कि वे अपने अनुभवों और कहानियों के माध्यम से बच्चों को जीवन की कला सिखाएं। उन्होंने इस आयोजन की सफलता पर सभी शिक्षकों और बच्चों को बधाई दी। कार्यक्रम ने दादा-दादी और नाना-नानी के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए उनके महत्व को एक बार फिर से स्थापित किया।




