गौ भक्तों ने मनाया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी का प्रकटोत्सव

बैतूल। उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का 56वां प्रकटोत्सव बैतूल जिले में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शनिवार 26 जुलाई को इस पावन अवसर पर जिले के सैकड़ों गौ भक्तों और गुरु भक्तों ने आयोजन में भाग लिया।

गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने स्वामी श्री जी के चित्र पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पुष्पहार अर्पित कर जन्मोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर गौ भक्तों ने स्वामी जी के जीवन और धर्म सेवा की चर्चा कर उन्हें वंदन किया। इस अवसर पर युवराज मालवीय श्री गौड़ के साथ दीपक वर्मा गौ नगरपालिका अध्यक्ष, शिव धामोड़े गौ रक्षक, शिव नामदेव गौ संरक्षक, राजेश गंगारे गोपुत्र, राजू राठौड़ गोपुत्र, यादोराव खातरकर गौ रक्षक, राज झारखंडे, भावेश मालवीय, यश मालवीय, प्रज्ञा दाते, दीपक मालवी, मनीष वर्मा, ऋषि पाटिल, सुनील चौधरी, राजेश, प्रशांत मालवीय, संतोष कुबड़े, राजेश बिजवे, राजेश राय सहित सैकड़ों की संख्या में गौ भक्तों व गुरु भक्तों ने भाग लिया।पूरे आयोजन में धर्म, सेवा, संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

– गौ ध्वज की प्रतिष्ठा के साथ बटुकों को किया वस्त्रदान

इस संबंध में जानकारी देते हुए गौ सांसद प्रतिनिधि डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि वर्तमान में शंकराचार्य जी महाराज का चातुर्मास व्रत मुंबई में चल रहा है। वहीं आज के इस विशेष दिन पर देश-विदेश से हजारों संत और भक्तजन वहां उपस्थित हुए। मुंबई में प्रातःकाल शहनाई वादन के साथ शंकराचार्य जी को जगाया गया। इसके पश्चात गौ ध्वज की प्रतिष्ठा की गई और बटुकों को वस्त्रदान किया गया।

– 8 फीट ऊंचे विग्रह का अनावरण

गौ पूजन के बाद आद्य शंकराचार्य जी के 8 फीट ऊंचे विग्रह का अनावरण किया गया। इसके उपरांत 56 कन्याओं का पूजन कर उन्हें सौंदर्य सामग्री भेंट की गई। साथ ही 56 मात्र शक्तियों ने फूलों से स्वामी जी का अर्चन किया। विशेष आकर्षण रहा तुला दान, जिसमें रबड़ी, मालपुआ, चावल, फल और पेड़ा से तुला दान किया गया। इसके बाद 11 माताओं ने आरती कर शंकराचार्य जी को प्रवेश मंडप में ले जाया। वहां मंच पर काशी सहित देश के विभिन्न भागों से आए विद्वानों ने उनका अभिनंदन किया।

मुंबई में इस आयोजन को और भव्य बनाने वाले क्षण रहे जब सुप्रसिद्ध भजन गायकों उदित नारायण, सुरेश वाडेकर और अनुराधा पौडवाल ने भक्ति गीत और स्तोत्र प्रस्तुत किए। उनके सुरों ने समस्त वातावरण को आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया।

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