ये कैसा विकास: गर्भवती महिला को झोली में डालकर चार किमी दूरी तय कर लाए ग्रामीण

Betul News : बैतूल। प्रदेश में भाजपा सरकार विकास पर्व मना रही है और आदिवासी बहुल बैतूल जिले में ग्रामीण सड़क के लिए तरस रहे हैं। हालत यह है कि कई गांवों के लोगों के लिए वर्षाकाल के चार महीने सबसे पीड़ादायक होते हैं।हैरानी की बात यह है कि सरकार के द्वारा गांव-गांव पहुंचने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, नेताओं को हर बार गांवों में जनता के बीच पहुंचने के लिए कहा जाता है लेकिन कोई भी अधिकारी और नेता ऐसा नही है जो वर्षाकाल में नदी-नालों में बहते पानी के बीच से गुजरकर गांव तक पहुंचने की हिम्मत दिखा सके।

बैतूल जिले के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक शर्मनाक मामला भीमपुर विकासखंड के ग्राम भंवईपुरा में सामने आया है। जो भी इस तस्वीर को देखेगा वह सिस्टम के खोखलेपन और जिम्मेदार नेताओं के निकम्मेपन को कोसेगा जरूर।

आइये हम आपको बताते हैं कि भाजपा के विकास पर्व और कांग्रेस के आदिवासी स्वाभिमान यात्रा का झूठा दंभ भरने वालों से गांव का विकास कितना दूर है।

बैतूल जिले में कालापानी कहे जाने वाले भीमपुर विकासखंड में आने वाली ग्राम पंचायत चिल्लौर के अंतर्गत आता है ग्राम भंवईपुरा। इस गांव की आबादी 700 से ज्यादा है और 460 मतदाता हर चुनाव में अपना नेता चुनने के लिए वोट देने मतदान केंद्र पहुंचते हैं। इस गांव तक पहुंचने के लिए गांव के लोगों को जंगल के बीच से बनी पगडंडियां ही सहारा हैं।

ग्राम पंचायत मुख्यालय से आठ किमी की दूरी पर स्थित भंवईपुरा के सबसे नजदीक गांव है मेघनाथ ढाना। इसकी भी दूरी चार किमी है। मेघनाथ ढाना तक कच्ची ही सही लेकिन सड़क है जिससे वाहनों की आवाजाही वर्षाकाल में हो जाती है। इस गांव तक पहुंचने के लिए भंवईपुरा के निवासियों को चार किमी की दूरी जंगल के रास्ते से तय करना पड़ता है। रास्ते में नदी भी है जो वर्षाकाल में बाढ़ होने पर गांव के लोगाें को पार करना जान जोखिम में डालने के लिए मजबूर कर देती है। वर्षाकाल के बाद भी जब तक नदी में पानी होता है ग्रामीण उसे पार करने के लिए मजबूर होते हैं।

कपड़े की झोली बनाई और कंधों पर टांगकर गर्भवती को लेकर चार किमी की दूरी पैदल तय की

ग्राम भंवईपुरा के निवासियों की बेबसी की एक तस्वीर शनिवार को तब सामने आई जब प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को अस्पताल पहुंचाना था। गांव तक न तो सड़क है और न ही कोई अन्य साधन ही मौजूद थे। ऐसे में गांव के लोगाें ने तय किया कि उसे कपड़े की झोली बनाकर कंधों पर टांगा जाए और फिर चार किमी की दूरी पैदल तय की जाए। परिवार के लोग और ग्रामीणों ने ग्राम भंवईपुरा में 19 वर्षीय ललिता पति महेश को शनिवार को ग्राम मेघनाथ ढाना तक दो लकड़ी में चादर बांधकर झोली बनाकर उसमें डालकर पहुंचाया। चार किमी लंबे रास्ते में चामुल नदी में पानी होने के बाद भी ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर उसे मेघनाथ ढाना तक पहुंचाया। यहां से उसे निजी वाहन में सवार कर भीमपुर अस्पताल ले जाया गया। भीमपुर के अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया गया और उसने बालक को जन्म दिया है।

ग्राम पंचायत चिल्लौर के सरपंच श्यामलाल इरपाचे की मानें तो भंवईपुरा तक सड़क बनाने के लिए वर्ष 2017 से लगातार मांग हो रही है। हर कलेक्टर, जिला पंचायत के सीईओ और हर नेता के पास गांव के लोगों ने अपना दर्द बताया। किसी ने भी आज तक सड़क और नदी पर पुल बनाने के लिए प्रयास तक करने का काम नहीं किया है।गांव के लोग आज भी जैसे-तैसे नदी पार कर जंगल के रास्ते से पंचायत मुख्यालय तक पहुंचते हैं।

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