महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के सस्वर गूंजा स्वदेशी मेला
विश्वमांगल्यसभा बैतूल के 51 सदस्यों ने स्तोत्र पाठ से जगाई स्व चेतना

स्वदेशी मेला बना संस्कृति, संस्कार और शक्ति आराधना का मजबूत मंच
बैतूल। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित स्वदेशी मेला प्रतिदिन उत्साह के साथ संचालित हो रहा है, जहां हर दिन हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जिलेभर के नागरिक स्वदेशी अभियान को समर्थन दे रहे हैं और मेला स्थल पर स्थानीय संस्कृति, परंपरा और युवा कलाकारों को एक प्रभावशील मंच मिल रहा है। इसी क्रम में विश्वमांगल्यसभा बैतूल के 51 प्रशिक्षित सदस्यों ने सफल और सबल राष्ट्र निर्माण की कामना से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का सस्वर पाठ किया, जिसकी दिव्य ध्वनि से उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
इस अवसर पर विश्वमांगल्यसभा की अखिल भारतीय प्रशिक्षण प्रमुख एवं मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ प्रांत संगठन मंत्री सुश्री पूजा पाठक ने कहा कि स्वदेशी का भाव केवल अवसरों पर नहीं, बल्कि प्रतिदिन जीवन में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में “भ” के मूल अर्थ “ओज” को बढ़ाने के लिए भाषा, भूषा और भोजन में स्व का बोध निरंतर जागृत रहना चाहिए। तभी देश सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा हो सकेगा। सुश्री पूजा पाठक ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि राष्ट्र निर्माण को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी को अपनाएं और इसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में बैतूल जिले के लोकप्रिय विधायक एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुलताई विधायक योगेश पंडाग्रे, घोड़ाडोंगरी विधायक श्रीमती गंगाबाई उइके, भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष सुधाकर पवार, मेला संगठन मंत्री हेमंत रावत, मेला प्रभारी श्रीमती हेमलता कुंभारे, जिला संयोजक श्रीमती ममता मालवी, सह संयोजक उज्जवल प्रताप सिंह ठाकुर और डॉ. अंकिता सीते सहित अनेक अतिथि उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में विश्वमांगल्यसभा की अध्यक्ष एवं प्रांत सह कोषाध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा खंडेलवाल, प्रांत संयोजिका प्रांजल तल्हारकर, नगर संयोजिका सोनाली वागद्रे, सचिव शामिनी देव, धर्म शिक्षा विभाग प्रमुख साक्षी शर्मा के साथ बैतूल और बैतूल बाजार नगर की संपूर्ण सदस्याए उपस्थित रहीं। दिव्य स्तोत्र पाठ ने मेले में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया और स्वदेशी अभियान के प्रति नागरिकों में नया उत्साह महसूस हुआ।




