Celebration of birth of daughters: जन्म लेते ही देवी स्वरूप 24 बेटियों को भेंट किए चांदी के लॉकेट

बैतूल। जहां आज भी कई परिवारों में बेटी के जन्म पर मायूसी छा जाती है, वहीं मां शारदा सहायता समिति ने सेवा और सम्मान की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। बेटियों के जन्म को ईश्वरीय उपहार मानते हुए संस्था ने उन्हें देवी स्वरूप मानकर चांदी के लॉकेट भेंट किए और माताओं का सम्मान किया गया।
मां शारदा सहायता समिति ने सोमवार 30 जून को संस्था की नन्ही चेतना योजना और रक्तवीर प्रकाश बंजारे के जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाते हुए गत तीन दिनों में जन्म लेने वाली 24 बेटियों को मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के प्रतिमा स्वरूप चांदी के लॉकेट भेंट किए गए।
इस आयोजन में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भावना कवड़कर, डॉक्टर रूपल श्रीवास्तव, समाजसेवी संजय शुक्ला, पिंकी भाटिया, करण प्रजापति, शैलेंद्र बिहारिया, हिमांशु सोनी, निमिष मालवीय, डॉक्टर सागर बिंझाड़े, पंजाबराव गायकवाड़, श्रीमती हेमसिंग चौहान, प्रकाश मकोड़े, युवराज सिंह गौड़ और प्रवीण परिहार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
– बेटी का जन्म किसी देवता के अवतरण से कम नहीं
इन सभी ने माताओं को गौरव सम्मान प्रदान कर यह संदेश दिया कि बेटी का जन्म किसी देवी के अवतरण से कम नहीं है। कार्यक्रम में डॉक्टर सागर बिंझाड़े और प्रकाश बंजारे ने बताया कि इस आयोजन का मकसद बेटियों के जन्म को गौरव का क्षण बनाना है। बेटियों को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें प्रतीकस्वरूप चांदी के लॉकेट भेंट किए गए ताकि उनका आगमन पूरे परिवार के लिए अभिमान का कारण बने।
संजय शुक्ला, पंजाबराव गायकवाड़, प्रकाश मकोड़े और श्रीमती हेमसिंग चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेटियों के महत्व पर विस्तृत विचार रखे। वहीं, शैलेंद्र बिहारिया और हिमांशु सोनी ने अपनी बात को कविता की भावपूर्ण पंक्तियों में पिरोया मेहंदी, कुमकुम, रोली का त्योहार नहीं होता, रक्षाबंधन में चंदन का प्यार नहीं होता, और वो घर हरदम सुना-सुना रहता है, जिस घर में बेटियों का अवतार नहीं होता।
– बेटी के जन्म पर ऐसा मान-सम्मान मिलना एक नई सामाजिक सोच
उन्होंने कहा कि आज भी कई घरों में बेटी के जन्म पर उदासी छा जाती है, लड़का-लड़की में भेदभाव किया जाता है। इसी मानसिकता को बदलने के लिए यह कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम में जब माताओं को सम्मानित किया गया तो कई की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म पर ऐसा मान-सम्मान मिलना एक नई सामाजिक सोच की शुरुआत है। मां शारदा समिति की यह पहल बेटियों के लिए नहीं, पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है।




