उच्च शिक्षा में समानता के समर्थन में एकजुट हुआ आदिवासी समाज|

यूजीसी के नए नियम को बताया ऐतिहासिक बदलाव का आधार। यूजीसी समता विनियम के समर्थन में सौंपा ज्ञापन।

बैतूल। समस्त आदिवासी समाज संगठन द्वारा एसटी, एससी, ओबीसी मोर्चा के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026 के समर्थन में डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य एवं मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के नाम प्रेषित किया गया।

संगठन के दिलीप सिंह धुर्वे ने 13 जनवरी 2026 को जारी यूजीसी विनियम को संविधान की भावना के अनुरूप एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह नियम अनुच्छेद 14, 15(4), 15(5), 16(4), 21, 38 एवं 46 के तहत समानता, सामाजिक न्याय और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक हितों को मजबूत करता है। लंबे समय से उच्च शिक्षा में असमानता और भेदभाव का सामना कर रहे आदिवासी वर्ग के लिए समता प्रकोष्ठ, भेदभाव निवारण व्यवस्था और निगरानी तंत्र जैसे प्रावधान बेहद जरूरी हैं।

बीएल मासोदकर ने मांग रखी कि विनियम का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, समता प्रकोष्ठों की नियमित निगरानी और सोशल ऑडिट किया जाए तथा अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और प्रतिनिधित्व आधारित वातावरण बनाया जाए। उन्होंने इसे संवैधानिक नैतिकता और समावेशी लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया गया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान आदिवासी समाज संगठन के जिला अध्यक्ष सुंदरलाल उइके, जयस जिलाध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे, बीएल मासोदकर, सरनेराव पाटिल, अंतू सिंह मर्सकोले, दिलीप सिंह धुर्वे, जितेंद्र सिंह इवने, महेश शाह उइके, चुन्नीलाल, प्रेम खातरकर, भूपेंद्र सिंह पंद्राम, अमीश खारे, मदन चौहान, अशोक उइके, कुंवरलाल काकोड़िया, अरविंद चौकीकर, कपिल मर्सकोले, चीनू उइके, विशाल धुर्वे, फत्तू सिंह उइके, राजू उइके, एएल चौकीकर, रामप्रसाद उइके, योगेश धुर्वे सहित अन्य सामाजिक बंधु उपस्थित रहे।

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