Betul news: पहले राजा पेट से और अब पेटी से पैदा होते हैं, लेकिन हमने लोकतंत्र को स्वीकार कर लिया: डॉ. राजे मुधोजी भोसले
मुलतापी के ताप्ती सरोवर की दशा देखने पहुंचे महाराजा ऑफ नागपुर

बैतूल। विदर्भ के महाराजा रघु जी भोसले के वंशज डॉ. राजे मुधोजी भोसले, जो नागपुर के महाराजा ट्रस्ट और मराठा विद्या प्रसारक समाज के अध्यक्ष हैं, मुलतापी (वर्तमान मुलताई) के ताप्ती सरोवर की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। यह वही सरोवर है जिसका निर्माण उनके पूर्वजों ने करवाया था। लगभग 204 साल बाद भोसले परिवार के प्रतिनिधि डॉ. भोसले ने मुलतापी सहित बैतूल जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों का दौरा किया।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ. राजे मुधोजी भोसले ने कहा, मेरे पूर्वज मुलतापी आते रहे हैं, लेकिन बाद के वंशज नहीं आ पाए। मैं दूसरी बार मुलतापी आया हूं और अब नियमित रूप से आता-जाता रहूंगा। उन्होंने इस दौरान लोकतंत्र के महत्व को स्वीकारते हुए कहा, पहले राजा पेट से और अब पेटी से पैदा होते हैं, लेकिन हमने लोकतंत्र को स्वीकार कर लिया है और हम इसमें विश्वास करते हैं।
डॉ. भोसले ने ताप्ती सरोवर की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के कारण सरोवर की दिशा बदल चुकी है। उन्होंने बताया, जहां आज गोमुख बना हुआ है, वह ताप्ती जल का निकासी द्वार नहीं है। असली निकासी मार्ग काले पत्थरों से बना गोमुख था, जिस पर आज कुंबी समाज का भवन बना हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ मिलकर ताप्ती सरोवर को अतिक्रमण मुक्त करवाने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास प्रमाण हैं कि मुलताई नगर में कई जमीनें उनके पूर्वजों ने ताप्ती मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों को दान में दी थीं। वे इन जमीनों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराने का प्रयास करेंगे और हर वर्ष मुलताई आने की बात कही।
ताप्ती नदी के समग्र विकास और ताप्ती कोरिडोर पर चर्चा करते हुए डॉ. भोसले ने कहा कि वे प्रदेश सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। इस अवसर पर बैतूल के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और साहित्यकार रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढ़ावाला ने अपनी पुस्तक मेरा बेतूल की एक प्रति उन्हें भेंट की। पुस्तक की प्रस्तावना पढ़ने के बाद डॉ. भोसले ने इसे महत्वपूर्ण जानकारी का संग्रह बताया।




