land rights: जनजाति तथा बंगाली सदस्यों को दिया जाएगा भूमि का अधिकार 

शक्तिगढ़ ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय

बैतूल। घोड़ाडोंगरी तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम शक्तिगढ़ में गांधीग्राम कोयला खदान के संबंध में ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से जनजातीय सदस्यों को विधि के अनुसार गांधी ग्राम राजस्व क्षेत्र की भूमि का अधिकार प्रदान किया है। गौरतलब है कि गांधी ग्राम राजस्व क्षेत्र खसरा नंबर 103 की भूमि पर वर्षों से जनजातीय सदस्य काबिज है। ग्राम सभा ने प्रस्ताव लिया कि भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनरव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिनियम 2013 की धारा 41 भूमि का कोई अर्जन यथा संभव अनुसूचित क्षेत्रों में नहीं किया जाएगा। ग्राम सभा से मिली जानकारी के अनुसार एसडीएम शाहपुर द्वारा पारित प्रकरण क्रमांक 2 अ- 82 वर्ष 2021 -2022 पारित आदेश अनुसार भू अर्जन की प्रक्रिया के आदेश को पेसा नियम 2022, नियम 12 उप नियम 1 के क और ख में प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व में की गई समस्त भू अर्जन की कार्रवाई आदेश को शून्य कर स्थगित किया गया है। भविष्य में अधिग्रहण की जाने वाली भूमि खसरा नंबर 23, 24 28, 30, 32, 33, 34, 35, 36, 37, 38, 40, 44, 45, 46, 47, 48, 49, 50, 51, 53, 54, 55, 56, 58, 59, 60 अन्य अर्जित की जाने वाली भूमि सरकारी निस्तार भूमि खसरा नंबर 31, 41, 42, 43, 52, 57, 61, 62, 68, 72, 78, 84, 134 वन भूमि खसरा नंबर 03, 24, 26, 29, 42, 74, 75, 85, 91, 92, 97, 105, 106, 108, 110, 112, 114, 118, 120, 122, 123, 125, यह संपूर्ण भूमि कोयला खदान हेतु आरक्षित की गई है। जिसे खदान क्षेत्र से प्रभाव मुक्त किया गया है।

प्रस्ताव क्रमांक 2 में उल्लेख किया गया कि ग्राम सभा क्षेत्र के भीतर ग्राम के कुछ किसानों ने ग्राम सभा की अनुमति के बगैर क्षेत्रीय महाप्रबंधक वेकोली पाथाखेड़ा के पक्ष में अपनी भूमि हस्तांतरित कर दी है। यह संपूर्ण भूमि खसरा नंबर 169, 107, 13 यह भूमि ग्राम सभा आगामी निर्णय तक अपने पक्ष में लेती है। नीलगढ़ के सदस्यों को भू अधिकार पत्र के संबंध में गांधीग्राम राजस्व क्षेत्र खसरा नंबर 103 की भूमि पर जनजाति सदस्य काबिज है। पारित प्रस्ताव के अनुसार समाज सदस्यों को विधि के अनुरूप भूमि अधिकार पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया की जाएगी। गांधीग्राम कोयला खदान के लिए निजी सरकारी तथा वन भूमि लगभग 1700 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। आदिवासी हेमन्त सरियाम का कहना है कि जिस पुनर्वास नीति के तहत बंगालियों को बसाया गया है, नियमानुसार यह अपनी जमीन किसी को बेच सकते हैं ना किसी से जमीन खरीद सकते हैं। पांचवी अनुसूची क्षेत्र होने तथा पुनर्वास नीति लागू होने के बाद यह अधिग्रहण नियमों के खिलाफ है।

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