Traffic Jam On The Highway : बैतूल-भोपाल हाइवे पर दो घंटे चक्काजाम, नर्सिंग के विद्यार्थियों ने किया प्रदर्शन

Traffic Jam On The Highway :बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार को बैतूल-भोपाल नेशनल हाइवे पर करीब दो घंटे तक आवागमन ठप रहा। नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों ने सोनाघाटी के पास नेशनल हाइवे पर चक्काजाम कर दिया और परीक्षाएं आयोजित करने की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार विद्यार्थियों को समझाइश दी लेकिन वे हाइवे से नही हटे और मौके पर ही कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।

आखिर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी को ही मौके पर पहुंचना पड़ा। कलेक्टर से विद्यार्थियों ने चर्चा की और कहा कि कालेजों को अपात्र कर दिया गया है जिससे उनकी परीक्षा नही हो रही है। जब कालेजों में मापदंड का पालन नहीं हो रहा था तो उन्हें मान्यता क्यों दी गई। यदि अब जांच में अपात्र पाए गए हैं तो जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश लेकर पढ़ाई की है उनकी परीक्षाएं तो आयोजित कराई जाएं। इसके बाद नए प्रवेश बंद कर दिए जाएं। कलेक्टर ने समझाइश दी है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई हुई है। इस कारण से उच्चाधिकारियों से इस संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। शासन स्तर से जो भी निर्णय होगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर के द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने चक्काजाम समाप्त किया।

पुलिस से हुई तकरार:

नेशनल हाइवे पर चक्काजाम करने के लिए विद्यार्थी दोनों लेन पर बैठ गए थे। पुलिस मौके पर पहुंच गई और हाइवे पर यातायात प्रारंभ कराने के लिए उन्हें हटाने का प्रयास किया। इससे विद्यार्थियों की पुलिस से जमकर तकरार हो गई। प्रशासनिक अधिकारियाें ने भी समझाने का प्रयास किया लेकिन विद्यार्थी कलेक्टर को ही माैके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। आखिर कलेक्टर के पहुंचने और उनसे चर्चा कर ज्ञापन लेने के बाद प्रदर्शन खत्म किया गया।

विद्यार्थियों ने बी.एस.सी. नर्सिंग महाविद्यालयों में प्रवेशित छात्रों की पिछले 2-3 वर्ष से परीक्षा आयोजित नहीं करने पर जमकर नाराजगी व्यक्त की। विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा नहीं होने से कोर्स का समय दो साल बढ़ गया है। यदि वे डिग्री मिलने के बाद शासकीय नौकरी के लिए एप्लाई करेंगे तो उनकी उम्र ज्यादा हो जाएगी, उनके ओवर ऐज होने का खतरा बना रहेगा।

उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में सत्र 2020-21 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की अब तक परीक्षा नहीं हुई। उन्होंने शासन से मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश लिया था। उनका अध्यापन और प्रशिक्षण पूरा हो गया, लेकिन परीक्षा न होने उनका कोर्स दो साल बढ़ गया। जिसका असर उनकी आयु सीमा पर पड़ेगा। उनकी मांग है कि जल्दी परीक्षा करा दी जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए।

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