Betul News : माझी सरकार ने शाहपुर थाने का घेराव, एएसआई ने मांगी माफी
बालिका की गुमशुदगी के मामले में पुलिस के खिलाफ लगाए लापरवाही के आरोप

Today Betul News : बैतूल। आदिवासी बालिका की गुमशुदगी के मामले में पुलिस के लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैया को लेकर सोमवार को माझी सरकार ने शाहपुर थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। सैकड़ों की संख्या में आदिवासियों ने थाने का घेराव कर बालिका की तत्काल दस्तयाबी के साथ साथ अभद्रता करने वाले पुलिस कर्मियों से माफी मांगने की मांग की।

बालिका की मां का आरोप है कि गुम हुई बालिका को दस्तयाब किये जाने को लेकर शाहपुर के एएसआई नरेंद्र ठाकुर ने गौहर गंज जाते वक्त अभद्रता की थी। यह बात जब मांझी सरकार सैनिको को पता लगी तो उन्होंने थाने का घेराव किया। मांझी सरकार सैनिक एसएसआई नरेंद्र ठाकुर से सार्वजनिक माफी मांगने पर अड़ गए। एएसआई नरेंद्र ठाकुर को सामने आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी।इसके बाद ही मांझी सरकार का प्रदर्शन खत्म हो सका।
यह है पूरा मामला
मांझी सरकार सैनिक संस्था मध्य प्रदेश के कोषाध्यक्ष श्रवण परते, जिला अध्यक्ष नवरंगसिंह आहके ने बताया कि 20 जुलाई को बालिका अचानक घर से लापता हो गई। दो-तीन दिन तक लगातार रिश्तेदारी में खोज की जाती रही, लेकिन पता न लगने की स्थिति में गांव के चार लोगों को साथ लेकर थाने में गुमशदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। उसके बाद पुलिस कर्मियों द्वारा 6-7 दिन बाद बालिका का पता बताया कि तुम्हारी बालिका, ग्राम गोहर-गंज जिला रायसेन में हैं। बालिका का सुराग लगने के बावजूद पुलिस बालिका को दस्तयाब करने के बजाय लापरवाही बरतती रही और कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसी बीच परिजनों को जानकारी मिली कि बालिका को सोनू कहार नामक युवक ले कर गया है और उसे गोहर गंज में रखा है। इस सूचना के बावजूद पुलिस द्वारा कार्रवाई में लापरवाही बरती गई। जिसके बाद आदिवासी समाज में पुलिस के इस लापरवाह रवैये को लेकर आक्रोश उत्पन्न हो गया और गुस्साएं आदिवासियों और माझी सरकार ने थाने का घेराव कर डाला।
पुलिस से बार-बार मिन्नते करती रही बालिका की मां
देशावाड़ी में रहने वाली बालिका की मां का आरोप है कि गुम हुई बालिका को दस्तयाब किए जाने को लेकर शाहपुर के ही एक पुलिस अधिकारी से बार बार मिन्नतें की जाती रही, लेकिन हर बार पुलिस टरकाती रही। यही नहीं परेशानी के चलते जब पुलिस पर दबाव बनाया गया तो हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कार्यवाही किए जाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई, जिसके बाद इसकी जानकारी शांति निवारण समिति और मांझी सरकार को दी।




