सिविल अस्पताल आमला में 43 आउटसोर्सिंग भर्तियों पर भ्रष्टाचार के आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग

रिश्वतखोरी और टेंडर अनियमितता के आरोपों से घिरा सिविल अस्पताल आमला

जनसुनवाई आमला में शिकायत, 43 पदों की भर्ती प्रक्रिया रोकने और ठेका कंपनी की जांच की मांग

बैतूल। आमला के सिविल अस्पताल में हाल ही में की गई 43 आउटसोर्सिंग भर्तियों और पिछले पांच वर्षों में रोगी कल्याण समिति के माध्यम से हुए खर्च को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसान संघर्ष समिति आमला के ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश यदुवंशी ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आमला को लिखित शिकायत सौंपकर भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक, ठेका कंपनी की जांच और रोगी कल्याण समिति के व्यय का उच्च स्तरीय ऑडिट कराने की मांग की है।

आवेदन में कहा गया है कि सिविल अस्पताल आमला में हाल ही में 43 पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई भर्तियों में नियमों को ताक पर रखा गया। योग्यता और अनुभव को दरकिनार कर अपात्र व्यक्तियों का चयन किए जाने का आरोप लगाया गया है।

आवेदन में यह भी उल्लेख है कि विश्वसनीय सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार इन भर्तियों में आर्थिक लेन-देन, यानी रिश्वतखोरी हुई है, जिससे पात्र और स्थानीय शिक्षित युवा रोजगार से वंचित रह गए। आउटसोर्सिंग का ठेका जिस कंपनी को दिया गया, उसकी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर निविदा प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया।

दिनेश यदुवंशी ने रोगी कल्याण समिति के माध्यम से विगत पांच वर्षों में खरीदी गई सामग्रियों पर भी सवाल उठाए हैं। आवेदन के अनुसार खरीदी गई सामग्रियों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य में भारी अंतर है तथा समिति के आय-व्यय के ब्यौरे में स्पष्टता नहीं है, जिससे गबन की आशंका व्यक्त की गई है।

शिकायत में मांग की गई है कि उक्त 43 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, संबंधित ठेका कंपनी के चयन और टेंडर दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच कराई जाए तथा रोगी कल्याण समिति के पिछले पांच वर्षों के ऑडिट के साथ खरीदी गई सामग्रियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित एजेंसी पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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