बोरदेही विवाद में निर्दोषों को एफआईआर में नामजद करने का आरोप
एसपी को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग

बैतूल। बोरदेही थाना क्षेत्र के ग्राम नजरपुर में 10 अगस्त की रात हुए विवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं रहे कुछ लोगों के नाम भी एफआईआर में शामिल किए गए हैं। पदाधिकारियों ने मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की।
शिकायत के अनुसार, 10 अगस्त की रात करीब 9 से 9.30 बजे ग्राम नजरपुर में संतोष सूर्यवंशी की दुकान के पास जुआ खेलने के दौरान 400 रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ। शिकायत में बताया गया कि इस दौरान राधे विश्वकर्मा, उमेश कोराई और विक्रम उइके के बीच कहासुनी और मारपीट हुई। वहीं शिकायतकर्ताओं राधे यादव, सागर सूरे और अंकुश धुर्वे का कहना है कि वे घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद उनके नाम प्रकरण में शामिल किए गए।
संगठन ने आरोप लगाया कि राधे विश्वकर्मा और राधे यादव के बीच पहले से विवाद चला आ रहा है और इसी कारण राधे विश्वकर्मा द्वारा राधे यादव और उनके साथियों पर लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं। संगठन का दावा है कि पूर्व में राष्ट्रीय हिंदू सेना के सदस्यों के संबंध में लगाए गए कुछ आरोप भी जांच में सही साबित नहीं हुए थे। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत विवाद को हिंदू संगठन के नाम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष संजू यादव ने कहा कि उनके अनुसार राधे विश्वकर्मा के कारण बजरंग दल की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने संगठन से मामले पर ध्यान देने और संगठन के नाम का इस्तेमाल व्यक्तिगत विवादों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होने देने की बात कही।
ज्ञापन में राधे विश्वकर्मा पर बोरदेही क्षेत्र में जुआ संचालित करने के आरोप लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रात करीब 1 बजे एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें एक पत्रकार का नाम भी शामिल किया गया।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच के लिए संतोष सूर्यवंशी की दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की 10 अगस्त की रात की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराने की मांग की है। इसके अलावा बोरदेही थाना परिसर में उस रात की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को भी जांच में शामिल करने का आग्रह किया गया है, ताकि घटना के बाद थाने में मौजूद लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
ज्ञापन में कहा गया है कि मामले को लेकर पूर्व में भी आवेदन दिया गया था, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक संतोषजनक जांच नहीं हुई है। संगठन ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कराने के साथ आवश्यकता होने पर मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल जैसे तकनीकी साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि घटना के समय कौन-कौन लोग मौके पर मौजूद थे और किन परिस्थितियों में उनके नाम प्रकरण में शामिल किए गए। संगठन ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई तथा निर्दोष पाए जाने वाले लोगों को राहत देने की मांग की है।




