स्वस्थ आयु का सशक्त आधार है योग।

फोटो - डॉ. नवीन वागद्रे, बीएनवाईएस, लेखक एवं कंटेंट क्रिएटर।

21 जून आज वैश्विक चेतना का प्रतीक बन चुका है। यह वह अवसर है, जब संपूर्ण विश्व भारत की उस प्राचीन ज्ञान परंपरा को नमन करता है, जिसने हजारों वर्षों से मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान किया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम स्वस्थ आयु के लिए योग वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है।

बढ़ती आयु के साथ जीवन की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ उसे स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर और आनंदमय बनाए रखना भी आवश्यक है। योग इसी दिशा में प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करता है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की पहल पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। 177 देशों के समर्थन से पारित यह प्रस्ताव भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को मिली वैश्विक मान्यता का प्रतीक है।

योग की उत्पत्ति भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा में हुई है। संस्कृत के युज शब्द से निर्मित योग शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में आदि योगी शिव को योग का प्रथम गुरु माना गया है, जबकि महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग के माध्यम से इसे व्यवस्थित और वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया।

वर्तमान समय में तनाव, चिंता, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। ऐसे परिवेश में योग एक संतुलित जीवनशैली के रूप में उभरकर सामने आया है।

स्वस्थ आयु का आशय ऊर्जा, मानसिक स्पष्टता, सामाजिक सक्रियता और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण जीवन से है। बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों में जकड़न, मांसपेशियों की कमजोरी, संतुलन में कमी, स्मरण शक्ति का क्षय, नींद से जुड़ी समस्याएं और मानसिक तनाव सामान्य रूप से दिखाई देते हैं। नियमित योगाभ्यास इन चुनौतियों को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।

योगासन शरीर को लचीला और सुदृढ़ बनाते हैं। प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाकर शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाता है। ध्यान मन को शांत कर एकाग्रता, स्मरण शक्ति और सकारात्मक सोच को विकसित करता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी नियमित योगाभ्यास को प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ करने तथा जीवनशैली जनित रोगों के जोखिम को कम करने में उपयोगी माना गया है।

सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन और पवनमुक्तासन जैसे योगासन तथा अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी और नाड़ी शोधन जैसे प्राणायाम सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग शारीरिक सक्रियता, मानसिक प्रसन्नता और आत्मविश्वास बनाए रखने का सरल और सुरक्षित माध्यम है।

योग व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने, आत्मचिंतन करने और आंतरिक शांति का अनुभव करने की प्रेरणा देता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना और उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यालय और समाज के विभिन्न वर्ग यदि योग को अपनी दिनचर्या में स्थान दें, तो स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।

योग व्यायाम भर नहीं, बल्कि संतुलित, अनुशासित और सार्थक जीवन जीने की भारतीय कला है। स्वस्थ आयु की दिशा में यह सबसे सरल, सुलभ और प्रभावी उपाय है।

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