पथरीली पहाड़ी पर बना 40 लाख का अमृत सरोवर।

धुडियानई के अमृत सरोवर पर विवाद, भुगतान रोककर तकनीकी जांच की मांग । ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से की शिकायत।

बैतूल। भैंसदेही तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम धुडियानई में करीब 40 लाख रुपये की लागत से बने अमृत सरोवर पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तालाब निर्माण में न काली मिट्टी डाली गई, न पानी का उपयोग हुआ और पूरा काम मशीनों से महज दो दिनों में निपटा दिया गया। धुडियानई के ग्रामीणों का दावा है कि पथरीली पहाड़ी पर तैयार किए गए इस तालाब में पानी रुकने की संभावना बेहद कम है। जनसुनवाई में इसकी शिकायत कलेक्टर से की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिससे शासन की राशि का दुरुपयोग होने के साथ योजना के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

 शिकायत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत धुडियानई के खसरा क्रमांक 14 स्थित अमृत सरोवर (माहुल झोंझा) का निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। आरोप है कि तालाब निर्माण के दौरान आवश्यक काली मिट्टी और पानी का उपयोग नहीं किया गया तथा कार्यस्थल पर उपलब्ध मुरम, पत्थर और रेतनुमा सामग्री से ही निर्माण पूरा कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पूरी तरह पथरीली पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां पर्याप्त काली मिट्टी उपलब्ध नहीं थी और बाहर से भी मिट्टी नहीं लाई गई।

– दो दिन में मशीनों से पूरा हुआ काम

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अमृत सरोवर का पूरा निर्माण कार्य मशीनों के माध्यम से मात्र दो दिनों में कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने मौके पर विरोध भी दर्ज कराया, लेकिन इसके बावजूद एजेंसी ने कार्य जारी रखा। उनका आरोप है कि मशीनों के अत्यधिक उपयोग के कारण स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिल सका।

– रोजगार से वंचित हुए आदिवासी ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश निवासी आदिवासी समुदाय से हैं और उन्हें रोजगार की अत्यंत आवश्यकता है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में श्रमिकों की बजाय मशीनों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कार्य श्रम आधारित तरीके से कराया जाता तो स्थानीय लोगों को रोजगार का लाभ मिल सकता था।

– पहले भी की गई थी शिकायत

ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान ही इसकी शिकायत एसडीएम और जनपद पंचायत भैंसदेही के अधिकारियों से की गई थी, लेकिन अब तक न तो किसी प्रकार की प्रभावी जांच हुई और न ही गुणवत्ता में सुधार के लिए कोई कार्रवाई की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

– पांच साल के कार्यों की जांच की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर से अमृत सरोवर निर्माण कार्य के सामग्री भुगतान पर तत्काल रोक लगाने, तकनीकी एवं गुणवत्ता संबंधी निष्पक्ष जांच कराने तथा दोष पाए जाने पर पुनः गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही ग्राम पंचायत में पिछले पांच वर्षों के दौरान कराए गए निर्माण कार्यों की भी गुणवत्ता जांच कराने की मांग उठाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान स्थिति में तालाब का उपयोग किया गया तो उसमें पानी नहीं रुकेगा, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।

शिकायत करने वालों में ग्रामीण शंकर यादव, वासुदेव, भीमराव, बबली, मनोज, जगदीश, राजेश, अलकेश, संतोष, अनूप, पवन, चेतराम, विनोद, कृष्ण, मनीराम, श्यामलाल, बलदेव, अमरलाल, अशोक, जगदीश, राधेश्याम, मुन्ना सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे।

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