कमलेश प्रजापति ने पूर्ण की मां नर्मदा परिक्रमा साझा किए अनुभव ।

बैतूल। विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत धर्म प्रसार सह प्रमुख कमलेश प्रजापति ने 79 दिनों में माँ नर्मदा की पावन परिक्रमा पूर्ण कर दिव्य आध्यात्मिक अनुभूतियों को साझा किया। 27 फरवरी से प्रारंभ होकर 16 मई को पूर्ण हुई इस यात्रा को उन्होंने जीवन का अविस्मरणीय अध्याय बताते हुए कहा कि मां नर्मदा की कृपा ने हर कठिन क्षण में उनका मार्ग प्रशस्त किया।

कमलेश प्रजापति ने बताया कि मां नर्मदा परिक्रमा विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक और धार्मिक परिक्रमा मानी जाती है। यह यात्रा साधक को भीतर से बदल देती है और आत्मिक शांति का अनुभव कराती है। परिक्रमा के दौरान उन्हें हर कदम पर ऐसा अनुभव हुआ जैसे स्वयं माँ नर्मदा अपने भक्तों का संरक्षण कर रही हों।

उन्होंने बताया कि तेज धूप, लंबी पदयात्रा, भूख-प्यास और थकान जैसी परिस्थितियों के बीच हर मोड़ पर सहायता सहज रूप से मिलती रही। कहीं ग्रामीण जल लेकर खड़े मिले तो कहीं आश्रमों में भोजन और विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध हुई। यह अनुभव उनके लिए माँ की प्रत्यक्ष कृपा का प्रमाण रहा।

– संतों की सेवा ने किया प्रेरित

नर्मदा तटों पर स्थित आश्रमों और साधु-संतों का सेवा भाव यात्रा का सबसे प्रेरक पक्ष रहा। कई स्थानों पर संतजन वर्षों से परिक्रमा यात्रियों की सेवा में समर्पित हैं। यात्रियों को भोजन, आश्रय, औषधि और मार्गदर्शन देना उनके लिए मां नर्मदा की आराधना का माध्यम है।

– अलौकिक अनुभूतियों से भरी रही यात्रा

परिक्रमा के दौरान कई बार कठिन मार्गों पर सहज रास्ता मिल जाना, थकान के समय अनजान लोगों की सहायता मिलना और तटों पर अद्भुत शांति का अनुभव उनके लिए विशेष रहा। प्रातःकालीन आरती, मंदिरों की घंटिया और नर्मदे हर का जयघोष वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता था।

– स्वच्छ नर्मदा का दिया संदेश

यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर नर्मदा तटों पर गंदगी, प्लास्टिक और पूजा सामग्री का अनुचित विसर्जन देखकर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने श्रद्धालुओं से तटों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए “स्वच्छ नर्मदा – पवित्र नर्मदा” का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही सरकार से भी संरक्षण और स्वच्छता के लिए ठोस प्रयास करने की अपेक्षा जताई।

– जीवन दृष्टि में आया सकारात्मक परिवर्तन

कमलेश प्रजापति ने कहा कि इस परिक्रमा ने उन्हें धैर्य, सेवा, त्याग, श्रद्धा और मानवता का वास्तविक अर्थ समझाया। यात्रा के बाद उनके मन में गहन शांति और आत्मिक संतोष है। उन्होंने कहा कि नर्मदे हर आस्था, विश्वास और मां नर्मदा के प्रति पूर्ण समर्पण का जीवंत प्रतीक है।

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