ताप्ती के प्रवाह क्षेत्र की जमीन पर कब्जे की साजिश? तहसील की जांच में खुल रहे चौंकाने वाले तथ्य। 108 साल पुराने रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप, ताप्ती नदी की जमीन पर नाम बदलने का खेल उजागर।
1917 के रिकॉर्ड से 2026 तक कैसे बदले खसरे और नाम। ताप्ती विकास प्राधिकरण के आवेदन के बाद तहसील की जांच, 242 खसरे की जमीन पर बड़ा विवाद । मुलताई में 0.58 एकड़ से शुरू हुआ विवाद पहुंचा जांच तक।

बैतूल। जिले के मुलताई में ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र की जमीन को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है जिसने राजस्व रिकॉर्ड और जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला खसरा नंबर 242 की 0.58 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसके संबंध में ताप्ती विकास प्राधिकरण समिति मुलताई द्वारा दिए गए आवेदन के बाद तहसील प्रशासन ने मौके पर जांच कराई है। इस जांच में वर्षों पुराने रिकॉर्ड, खसरे के बंटवारे और जमीन के नाम बदलने को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
– नोटिस जारी कर बुलाए गए संबंधित पक्ष
तहसीलदार कार्यालय मुलताई द्वारा दिनांक 10 मार्च 2026 को जारी सूचना पत्र क्रमांक /प्रा०/तह०/2026 के माध्यम से छह संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मौके पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इनमें हनुमानदास पिता मोतीदास, किसनदास पिता नानकदास उदासी निवासी मुलताई, मुरलीधर पिता मंगल प्रसाद मुरारी लाल, पुरुषोत्तम, लक्ष्मीचंद,संतोष पिता सुरजमल अग्रवाल निवासी मुलताई, साधना पति सुरेश, प्रेमलता देवी पति मुरारीलाल, आशादेवी पति पुरुषोत्तम, किरण देवी पति लक्ष्मीचंद अग्रवाल निवासी मुलताई, ताप्ती विकास क्षेत्रीय समाज समिति मुलताई, उषा बाई पति वासुदेव जाति कुनबी निवासी मुलताई और प्रेमलता जौजे मुरारीलाल अग्रवाल निवासी मुलताई के नाम शामिल हैं।
– ताप्ती विकास प्राधिकरण के आवेदन से शुरू हुआ विवाद
ताप्ती विकास प्राधिकरण समिति मुलताई द्वारा तहसील कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 1917-18 में ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित खसरा नंबर 242 रकबा 0.58 एकड़ को अन्य व्यक्तियों के नाम पर परिवर्तित कर दिया गया है। आवेदन में कहा गया कि वर्तमान खसरा नंबर 560 में भूमि विकास के नाम पर छह बटांकन दर्ज हो चुके हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि यह बंटवारा किस आधार पर किया गया तथा मूल खसरा नंबर से भूमि कैसे कम की गई।
– जांच के लिए गठित दल ने किया मौके का निरीक्षण
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार मुलताई ने कार्यालय पत्र क्रमांक /जांच/2026/1712 दिनांक 13 फरवरी 2026 के आधार पर जांच दल गठित किया और 12 मार्च 2026 को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच की गई। जांच के दौरान संबंधित सभी पक्षों को दस्तावेजों सहित उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे और अनुपस्थित रहने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
– 1917 के रिकॉर्ड से 1954-55 तक की जमीन का पूरा इतिहास
मौके पर प्रस्तुत पंचनामा के अनुसार जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 242 की कुल 0.58 एकड़ भूमि वर्ष 1917-18 में दर्ज थी। बाद में वर्ष 1954-55 में खसरा नंबर 242 के तीन हिस्से कर दिए गए। इनमें खसरा 242/1 रकबा 0.38 एकड़ नालाबंदी, खसरा 242/2 रकबा 0.10 एकड़ सत्यनारायण मंदिर और खसरा 242/3 रकबा 0.10 एकड़ नाले के नाम दर्ज कर दिया गया।
– 1972-73 में बदला खसरा नंबर
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 1972-73 के दौरान पुराने खसरा 242/1 का नया नंबर 563 कर दिया गया और इसका रकबा 0.38 एकड़ दर्ज हुआ, जबकि इसका एक हिस्सा नदी की भूमि के रूप में दर्ज बताया गया।
– नए रिकॉर्ड में 560 नंबर से जुड़ा विवाद
दस्तावेजों के अनुसार खसरा 242/2 के कम नंबर 568 रकबा 0.10 एकड़ का नामांतरण सत्यनारायण मंदिर के नाम पर दर्ज है, जबकि अन्य रिकॉर्ड में खसरा नंबर 240 तथा 242/3 को मिलाकर खसरा नंबर 560 रकबा 1.60 एकड़ और 0.647 नाले के नाम दर्ज होना बताया गया। इसी तीसरे हिस्से में खसरा नंबर 563 भी शामिल बताया गया है और इसी हिस्से में प्लॉटिंग और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
– छह बटांकन सामने आए
जांच दल को मौके पर वर्तमान खसरा नंबर 560 के छह बटांकन अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर दर्ज होने की जानकारी मिली। जांच में यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 560/2 रकबा 0.247 एकड़ भूमि का संबंध पुराने खसरा नंबर 242/3 रकबा 0.10 एकड़ से जोड़ा जा रहा है, जिससे भूमि के वास्तविक रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
– जांच रिपोर्ट पंचनामा के रूप में तैयार
मौके पर उपस्थित जांच दल ने पूरी स्थिति का पंचनामा तैयार किया, जिसे संबंधित दस्तावेजों के साथ हस्ताक्षरित किया गया। इस पंचनामा पर घनश्याम सोनी, दिनेश कालभोर, रोहित करदाते, वीरेंद्र सहित अन्य अधिकारियों व उपस्थित व्यक्तियों के हस्ताक्षर दर्ज किए गए हैं।




