NSUI opposed the proof range expansion: प्रूफ रेंज विस्तार का एनएसयूआई ने किया विरोध
एनएसयूआई प्रदेश सचिव ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

लिखित स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ, तो जिलेभर में होगा आंदोलन
बैतूल। जिले के चिचोली, टेमरामाल, टेमरैयत, खदरा, रामपुर माल, मलाजपुर, चिकली, धप्पा, सेहरा, झारकुंड, खदारु सहित कई गांवों में प्रूफ रेंज विस्तार की संभावनाओं की खबरों से ग्रामीणों में भारी असंतोष और भय व्याप्त है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से नाराज़ एनएसयूआई के प्रदेश सचिव हर्ष भुसारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र लिखित स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ, तो जिलेभर में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
– जनप्रतिनिधियों का मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण
हर्ष भुसारी ने पूरे मामले में गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इतनी बड़ी योजना की संभावनाओं पर शासन-प्रशासन की चुप्पी और जनप्रतिनिधियों का मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में लोग इन गाँवों में पीढ़ियों से रह रहे हैं, खेती कर रहे हैं, रोजगार चला रहे हैं। ऐसे में बिना सार्वजनिक चर्चा और स्पष्ट जानकारी के इस तरह की योजना की खबरें आना न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है बल्कि आमजन के भविष्य और सम्मान पर सीधा आघात भी है।
हर्ष भुसारी ने कहा कि इन इलाकों में हजारों नागरिकों ने अपनी मेहनत की कमाई से घर, ज़मीन और व्यापार खड़ा किया है। हर एक-दो महीने में दर्जनों लोग छोटे-बड़े व्यवसाय प्रारंभ करते हैं। प्रूफ रेंज जैसी किसी योजना की अफवाहें इन सभी योजनाओं पर पानी फेरने वाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अफसरों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने जनता के बीच असमंजस और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
– स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों से की अपील
हर्ष भुसारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि शासन और प्रशासन ने तत्काल लिखित और आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो एनएसयूआई पूरे जिले में शांतिपूर्ण लेकिन प्रचंड जनआंदोलन का आगाज करेगी। उन्होंने प्रशासन, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से अपील की है कि वे बैतूल जिले के चिन्हित गाँवों के नागरिकों को भय, भ्रम और आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकालने के लिए जल्द से जल्द तथ्यात्मक और पारदर्शी स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।उन्होंने कहा कि यह केवल ज़मीन की बात नहीं है, यह लोगों की आजीविका, आत्मसम्मान और भविष्य का प्रश्न है। यदि कोई योजना बन भी रही हो तो उसमें प्रभावित गाँवों के लोगों की सहमति, भागीदारी और भलाई सर्वोपरि होनी चाहिए।




