Anti-malaria month concludes in Chicholi: बुखार को नजरअंदाज न करें, यह मलेरिया भी हो सकता है: डॉ संदीप धुर्वे

चिचोली में मलेरिया निरोधक माह का समापन
सोशल मीडिया बना जनजागरूकता का हथियार
स्वास्थ्य कर्मियों और आशाओं की मेहनत लाई रंग
चिचोली। जून माह के दौरान चिचोली ब्लॉक में मलेरिया को जड़ से खत्म करने की दिशा में जबरदस्त अभियान चला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव-गांव जाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के उपाय बताए, तो वहीं डिजिटल दौर के इस युग में सोशल मीडिया को भी जनजागरूकता का सबसे सशक्त हथियार बनाकर उपयोग किया गया।
सोमवार 30 जून को विकासखंड चिचोली में मलेरिया निरोधक माह जून का विधिवत समापन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप धुर्वे ने कहा कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है, इसलिए बुखार आने पर लापरवाही न करें और तुरंत खून की जांच अवश्य कराएं। उन्होंने बताया कि 1 जून से 30 जून तक मलेरिया निरोधक माह के अंतर्गत बीईई अनिल कटारे, बीपीएम एकनाथ ठाकुर, बीसीएम विनीत आर्य, एमटीएस पंकज डोंगरे के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया।
गतिविधि प्रभारी एमटीएस पंकज डोंगरे ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे माह ग्राम स्तरीय, सेक्टर स्तरीय और विकासखंड स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इसके साथ ही मलेरिया रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर वाहक जनित रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि पर जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं।
डोंगरे ने बताया कि आज विश्व सोशल मीडिया दिवस भी है और इस अवसर पर यह समझना जरूरी है कि फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब व ट्विटर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जनजागरूकता के सशक्त माध्यम बन चुके हैं। यही कारण है कि विभाग द्वारा मैदानी गतिविधियों के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को इन रोगों के लक्षण, बचाव और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई।
बीएमओ डॉ संदीप धुर्वे, बीईई अनिल कटारे, बीपीएम एकनाथ ठाकुर, बीसीएम विनीत आर्य एवं एमटीएस पंकज डोंगरे द्वारा सभी स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की गई कि वे जागरूकता फैलाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करें और आमजन को शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने हेतु प्रेरित करें। इस अभियान में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मलेरिया के खिलाफ जागरूकता की अलख जगाई, जो आने वाले समय में निश्चित ही मलेरिया नियंत्रण में सहायक सिद्ध होगी।




