Public Question: बैतूल प्रशासन से जनता का सवाल: गरबा पर लागू होगी सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन या चलेगी मनमर्जी

जुलूस में डीजे संचालकों ने किया शर्ताें का उल्लंघन तो मामला दर्ज कर की गई जब्ती की कार्रवाई, अब गरबा में शर्तों का पालन कराने प्रशासन की क्या रहेगी रणनीति

Public Question: बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रशासन एवं पुलिस के द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने एवं नियमों का उल्लंघन न ोहो इसके लिए कठोर एक्शन लेना प्रारंभ कर दिया है। ईद मिलादुन्नबी के जुलूस, संदल, गणेश विसर्जन जुलूस में नियमों के खिलाफ डीजे बजाने पर 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर तीन डीजे जब्त भी कर लिए हैं। आम जनता के द्वारा इस कार्रवाई को खूब सराहा जा रहा है। अब नवरात्र के करीब आने पर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन की नजर क्या गरबा के आयोजनों पर भी इसी तरह पैनी रहेगी या आयोजन के पीछे जुड़े बड़े चेहरों के कारण नियम शिथिल हो जाएंगे…?

बैतूल जिले की जनता यह सवाल प्रशासन से पूछ रही है कि जुलूस में डीजे संचालकों ने किया शर्ताें का उल्लंघन तो मामला दर्ज कर जब्ती की कार्रवाई भी कर दी गई है। अब गरबा में शर्तों का पालन कराने प्रशासन की क्या रणनीति रहेगी इसका खुलासा आयोजन के पूर्व ही हो जाना चाहिए। बैतूल नगर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में देवी की आराधना के नाम पर शहर में जगह-जगह गरबा महोत्सव के आयोजन तय हो गए हैं । इन आयोजनों को लेकर आयोजक तैयारी में जुटे हैं और गरबा में शामिल होने के लिए प्रतिभागी प्रैक्टिस भी करने लगे हैं। गरबा महोत्सव के लिए प्रशासन से ली जाने वाली अनुमति में दी गई शर्तों का कितना पालन होता है यह आयोजन के दौरान उजागर होगा लेकिन इसे रोकने के लिए कोई णनीति तैयार हुई है या नहीं यह अभी तक आम जनता के सामने नहीं आ पाया है।

दरअसल आम जनता के मन में यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले दिनों पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं करने वाले डीजे संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। अब यह भी बात सामने आ रही है कि गरबा महोत्सव में भी देर रात तक कानफोडू डीजे बजाना और फूहड़ गानों पर गरबा महोत्सव हो इस पर प्रशासन कितनी नजर रखता है । शहर के जागरूक नागरिकों में यह चर्चा होना शुरू हो गई है कि गरबा महोत्सव देवी की आराधना के लिए होता है, पर आयोजन में धार्मिक गीत कम बजते हैं ,फिल्मी गीत और फूहड़ गीत ज्यादा बजाए जाते हैं। जिससे ऐसा लगता है कि धार्मिक आयोजनों का मजाक उड़ाया जा रहा है ।

कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि गरबा महोत्सव अब व्यावसायिक हो गए हैं। प्रवेश पास के नाम पर आयोजक मोटी राशि वसूलते हैं । वैसे तो ऐसे आयोजन मनोरंजन कर की श्रेणी में आते हैं लेकिन पता नहीं क्यों प्रशासन इन पर ध्यान क्यों नहीं देता है।

 

बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार रात 10 बजे के बाद डीजे या साउंड सिस्टम नहीं बजाया जा सकते हैं और 10 बजे के पहले इनका डेसिबल निर्धारित होना चाहिए । पर प्रशासन ऐसे आयोजनों पर नकेल नहीं कसता है ।अब देखना है कि इस बार गरबा महोत्सव के आयोजन का समापन 10 बजे रात्रि में होता है या नहीं होता है ।अगर नहीं होता है तो पिछली कार्यवाही के पीछे प्रशासन का कोई दूसरा मकसद रहा होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन सभी पर लागू होती है

ध्वनि प्रदूषण को लेकर यह है न्यायालय के आदेश:

धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों में निर्धारित मापदंडों से अधिक ध्वनि प्रदूषण होने पर अधिकारी जाएं और तेजी से ध्वनि प्रदूषण करने वालों को उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने को कहें। अगर आयोजक नहीं मानता है तो उसके विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की जाएं जिसके तहत सजा का स्पष्ट प्रावधान है। कोर्ट के आदेश के अनुसार अवमानना याचिका दायर सम्बंधित अधिकारी (कलेक्टर, एसपी) को दायर करनी है इसलिए शासन की अनुमति की भी जरुरत नहीं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button