Betul news: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के खिलाफ बैतूल में शिकायत
आदिवासी समाज पर अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ जयस संगठन का विरोध

बैतूल। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा आदिवासी समाज पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है सोमवार 24 जून को जयस संगठन ने कलेक्टर के माध्यम से अनुसूचित जनजाति कार्यालय भोपाल को एक शिकायत आवेदन प्रेषित किया है, जिसमें कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस आवेदन में पूरे देश के आदिवासी समाज को अपमानित करने के आरोप लगाए गए हैं और मंत्री से इस्तीफे की मांग की गई है।
जयस संगठन के संदीप धुर्वे ने बताया कि इस घटना ने आदिवासी समाज के भीतर गहरी नाराजगी पैदा कर दी है और वे अपने सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हो गए हैं। आवेदन में बताया गया है कि किस प्रकार से आदिवासी समाज पर अत्याचार हो रहे हैं। हाल ही में घटी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कभी आदिवासी समाज की बहनों को दस फीट गड्ढे में गाड़ दिया जाता है तो कभी आदिवासी युवक पर पेशाब किया जा रहा है। जयस संगठन ने इन घटनाओं को समाज पर हो रहे अत्याचारों का उदाहरण बताया है और सरकार से इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है।
— यह हैं आदिवासी समाज की मांगें–
जयस संगठन ने आवेदन में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए उनसे इस्तीफा लिया जाए।पूरे आदिवासी समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचारों पर सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जयस संगठन का कहना है कि आदिवासी समाज भारत देश का मूल मालिक है और उन्हें अपमानित करना असहनीय है। संगठन ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। ज्ञापन सौंपने वालों में मनीष परते, राजू उइके, सौरभ सलामे, शिव परते, मनीष परते जयस ब्लॉक अध्यक्ष, सहित अनेक जयस कार्यकर्ता शामिल रहे। जयस संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर सरकार इस मामले में कार्रवाई नहीं करती है या मंत्री मदन दिलावर को पद मुक्त नहीं करती है, तो संगठन एक बड़ा आंदोलन करेगा। इस आंदोलन की जिम्मेदारी शासन की होगी। संगठन ने बताया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक आदिवासी समाज के साथ न्याय नहीं होता और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती।




