Demand for naming the college: महुआ महोत्सव में उठी वीर रामजी भाऊ कोरकू के नाम पर कालेज नामकरण की मांग
ट्राइबल 5 मिशन, नामकरण समिति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव ने दो सौ कलाकारों के साथ जनजातीय कार्य मंत्री को सौंपा आवेदन

बैतूल। भोपाल में आयोजित महुआ महोत्सव के दौरान बैतूल जिले के दो सौ आदिवासी कलाकारों ने भैंसदेही कालेज का नाम वीर रामजी भाऊ कोरकू के नाम पर करने की मांग की। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह को दिए गए आवेदन में उन्होंने अपनी इस मांग को प्रमुखता से उठाया।
ट्राइबल 5 मिशन और नामकरण समिति के अध्यक्ष महादेव बेठे कोरकू, उपाध्यक्ष करण चढोकार और सचिव शुभम बारस्कर ने दो सौ कलाकारों के साथ जनजातीय कार्य मंत्री को आवेदन सौंपा। महादेव बेठे ने कहा कि 2014 से आदिवासी समुदाय भैंसदेही कालेज का नामकरण वीर रामजी भाऊ कोरकू के नाम पर करने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि वीर रामजी भाऊ कोरकू जैसे क्रांतिकारी की पहचान दिलाना बहुत जरूरी है। करण चढोकार ने कहा कि आदिवासी समुदाय के दो विधायकों और एक सांसद के बावजूद भी वीर रामजी भाऊ कोरकू को पहचान नहीं मिल रही है, जो शर्मनाक है। नामकरण समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मांग पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वे भैंसदेही कालेज से मुख्यमंत्री निवास भोपाल तक पैदल यात्रा करेंगे।
— महुआ महोत्सव में आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम–
भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के स्थापना के 11वें वर्षगांठ समारोह महुआ महोत्सव के दूसरे दिन, 7 जून को, मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के कोरकू गडली सुसुन, थापटी और गायकी टाट्या कलाकारों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में कोरकू जनजाति के पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 200 कलाकार शामिल थे। इस अवसर पर संग्रहालय में कोरकू, बैंगा और भील समुदाय के घरों का लोकार्पण भी किया गया। महुआ महोत्सव का उद्घाटन जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने 6 जून 2024 को किया। इस अवसर पर सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा, संस्कृति संचालनालय के संचालक एन. पी. नामदेव, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी, और जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
— संस्कृति संरक्षक लालजी शीलू दादा का योगदान–
संस्कृति संरक्षक लालजी शीलू दादा ने संग्रहालय और जनजातीय लोक कला के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से हमारी संस्कृति को संग्रहालय में संरक्षित किया जा रहा है, उसी प्रकार वीर रामजी भाऊ कोरकू जैसे क्रांतिकारी पूर्वजों को पहचान दिलाना हमारा दायित्व है। उन्होंने संग्रहालय निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे को इस कार्य में सहयोग प्रदान किया है।




